बलरामपुर शिक्षा विभाग में सामान की आपूर्ति को लेकर विवाद, बिना सामान पहुंचे सर्टिफिकेट बनवाने का आरोप
बलरामपुर जिले के शिक्षा विभाग में वित्तीय अनियमितता के आरोपों के बीच स्कूलों में सामान की आपूर्ति से जुड़ा नया विवाद सामने आया है। आरोप है कि कुछ स्कूलों में सामान पहुंचे बिना ही CAC के जरिए सामान मिलने का प्रमाणपत्र तैयार कराने का दबाव बनाया जा रहा है। विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप की कथित चैट सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सवाल उठ रहे हैं। हालांकि वायरल चैट और आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे उन्हें बदनाम करने की साजिश बताया है।
UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l बलरामपुर जिले के शिक्षा विभाग में वित्तीय गड़बड़ी को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब स्कूलों में सामान की आपूर्ति से जुड़ा एक नया मामला सामने आया है। आरोप लगाया जा रहा है कि जिले के कुछ स्कूलों में सामान पहुंचने से पहले ही उसके प्राप्त होने का प्रमाणपत्र तैयार कराने का दबाव बनाया जा रहा है। इस पूरे मामले में CAC यानी संकुल अकादमिक समन्वयक की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप की कथित चैट सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि स्कूलों में सामान पहुंचा ही नहीं है, तो फिर सामान प्राप्त होने की रसीद या उपलब्धता प्रमाणपत्र किस आधार पर तैयार कराया जा रहा है। आरोप है कि स्कूल के प्रधान पाठक या प्राचार्य से प्रमाणपत्र लेने के बजाय CAC के माध्यम से इस तरह की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में सामने आई वायरल चैट और लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब बलरामपुर शिक्षा विभाग पहले से ही कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सवालों के घेरे में है। जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव पर करीब 4.51 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों को लेकर जांच और विवाद की स्थिति बनी हुई है। अब सामान की आपूर्ति और प्रमाणपत्र से जुड़ा मामला सामने आने के बाद पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
पूरे मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि स्कूलों में किसी सामग्री की वास्तविक आपूर्ति हुई है या नहीं, इसकी पुष्टि करने की जिम्मेदारी किस स्तर पर होनी चाहिए। शिक्षा विभाग से जुड़े जानकारों के अनुसार स्कूल में सामान पहुंचने के बाद उसकी उपलब्धता का रिकॉर्ड संबंधित स्कूल के प्रधान पाठक या प्राचार्य के स्तर पर दर्ज होना चाहिए। ऐसे में यदि स्कूल स्तर पर सामान प्राप्त होने की पुष्टि नहीं हुई है और किसी दूसरे माध्यम से प्रमाणपत्र तैयार कराया जा रहा है, तो यह प्रक्रिया जांच के दायरे में आ सकती है।
वहीं इस मामले को जिला शिक्षा अधिकारी के खिलाफ चल रही जांच से जोड़कर भी चर्चा की जा रही है। कुछ लोगों का सवाल है कि कहीं इस तरह के नए विवाद के जरिए मूल वित्तीय अनियमितता से जुड़ी जांच को प्रभावित या भटकाने की कोशिश तो नहीं की जा रही। हालांकि इस संबंध में भी कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
दूसरी ओर जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह से बेबुनियाद बताया है। उन्होंने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्हें एक साजिश के तहत बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उनका दावा है कि शिक्षा विभाग में सामान की खरीदी में किसी भी तरह की वित्तीय गड़बड़ी नहीं हुई है।
मनीराम यादव ने वायरल हो रही कथित व्हाट्सएप चैट को भी फर्जी और बेबुनियाद बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी CAC से इस तरह की कोई जानकारी नहीं मांगी है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल चैट किसने तैयार की और इसके पीछे क्या उद्देश्य है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
अब इस पूरे मामले में वायरल चैट की वास्तविकता, स्कूलों में सामान की आपूर्ति और प्रमाणपत्र तैयार करने की प्रक्रिया की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। यदि सामान की आपूर्ति और दस्तावेजों में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने की जरूरत होगी। फिलहाल आरोपों और वायरल सामग्री की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, जबकि जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। मामले को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच आगे की जांच से ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।