NHAI टोल प्लाजा फर्जीवाड़े में ED का बड़ा एक्शन, 7 राज्यों के 14 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी

NHAI टोल प्लाजा पर कथित फर्जी टोल वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने 7 राज्यों में 14 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। जांच में कथित तौर पर अनधिकृत सॉफ्टवेयर, फर्जी टोल रसीद और FASTag के जरिए अवैध वसूली तथा रकम को आधिकारिक सिस्टम से बाहर डायवर्ट करने के आरोप सामने आए हैं।

Sep 2, 2026 - 11:20
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NHAI टोल प्लाजा फर्जीवाड़े में ED का बड़ा एक्शन, 7 राज्यों के 14 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI के टोल प्लाजा पर कथित फर्जी टोल वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ा एक्शन लिया है। ED के लखनऊ जोनल कार्यालय की ओर से धन शोधन निवारण अधिनियम यानी PMLA, 2002 के तहत 7 राज्यों में एक साथ 14 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, दिल्ली-NCR और पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित परिसरों में की गई। जांच एजेंसी की कार्रवाई के दौरान डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है।

जांच के दौरान कथित तौर पर सामने आया है कि कुछ टोल प्लाजा पर अनधिकृत सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर फर्जी टोल रसीदें तैयार की जा रही थीं। आरोप है कि फर्जी FASTag के माध्यम से ओवरलोडेड और कमर्शियल वाहनों को नियमों से अलग तरीके से टोल पार कराया जा रहा था। इसके अलावा टोल से प्राप्त रकम को NHAI के आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम से बाहर डायवर्ट किए जाने की आशंका भी जांच के दायरे में है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क से कितनी रकम का लेनदेन हुआ और इसका वास्तविक लाभ किन लोगों तक पहुंचा।

ED की तलाशी में डिजिटल रिकॉर्ड, कंप्यूटर सिस्टम, दस्तावेज, बैंक खातों और कथित बेनामी संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। जांच एजेंसी कथित मनी ट्रेल का पता लगाने के साथ टोल संचालकों, IT से जुड़े कर्मचारियों और अन्य संदिग्धों के बीच संभावित वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल कर रही है। फॉरेंसिक जांच और NHAI के उपलब्ध रिकॉर्ड में अनधिकृत सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से जुड़े तथ्यों की जांच भी की जा रही है।

इस मामले में वाराणसी से आलोक सिंह की गिरफ्तारी का भी उल्लेख सामने आया है। उसे कथित तौर पर टोल घोटाले का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है और आरोप है कि वह वाराणसी के हरहुआ क्षेत्र से अवैध नेटवर्क का संचालन कर रहा था। वाराणसी के लाला नगर टोल प्लाजा से जुड़े करीब 62.87 करोड़ रुपये की कथित स्टांप चोरी के मामले की भी जांच की जा रही है। इसके अलावा देशभर के 200 से अधिक टोल प्लाजा जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं, जिनमें करीब 100 टोल प्लाजा उत्तर प्रदेश में होने की जानकारी सामने आई है।

ED की इस कार्रवाई का उद्देश्य कथित अवैध टोल वसूली से जुड़े पूरे नेटवर्क, धन के प्रवाह और अंतिम लाभार्थियों का पता लगाना है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित फर्जीवाड़े में कितने लोग और संस्थाएं शामिल थीं तथा टोल से संबंधित रकम को किस तरीके से सिस्टम से बाहर किया गया। फिलहाल विभिन्न स्थानों पर तलाशी और साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही कथित घोटाले की वास्तविक रकम और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।