जाति प्रमाण पत्र सरलीकरण की मांग को लेकर सावित्री जगत ने केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले को सौंपा ज्ञापन
छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के नागरिकों को जाति प्रमाण पत्र जारी करने में आ रही समस्याओं को लेकर उत्कल गांड़ा महिला महामंच की प्रदेश अध्यक्ष सावित्री जगत ने नई दिल्ली में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले से मुलाकात की। उन्होंने वर्ष 1950 या उससे पहले के दस्तावेजों की अनिवार्यता से उत्पन्न समस्याओं को दूर करने और केंद्र सरकार के 10 जून 2025 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की।
UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली l छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के नागरिकों को जाति प्रमाण पत्र जारी करने में आ रही व्यवहारिक समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर उत्कल गांड़ा महिला महामंच, छत्तीसगढ़ की प्रदेश अध्यक्ष सावित्री जगत ने नई दिल्ली पहुंचकर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के राज्य मंत्री रामदास आठवले से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने जाति प्रमाण पत्र की प्रक्रिया को सरल बनाने और पात्र नागरिकों को अनावश्यक दस्तावेजी कठिनाइयों से राहत देने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
सावित्री जगत ने मंत्री रामदास आठवले को बताया कि छत्तीसगढ़ में जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में वर्ष 1950 अथवा उससे पहले के दस्तावेजों की अनिवार्यता के कारण अनेक नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि राज्य गठन से संबंधित जाति प्रमाण पत्र के मामलों में केंद्र सरकार द्वारा 10 जून 2025 को जारी दिशा-निर्देशों को प्रभावी रूप से लागू किया जाए। साथ ही राज्य गठन की अधिसूचना की तारीख और उस समय की स्थायी निवास स्थिति को केंद्रीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप उचित महत्व देने की मांग की गई।
सावित्री जगत ने कहा कि छत्तीसगढ़ के अनेक ग्रामीण, गरीब, श्रमिक और सामाजिक रूप से वंचित परिवारों के पास करीब 75 वर्ष पुराने राजस्व, निवास या जातिगत अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में वर्ष 1950 के पुराने दस्तावेजों को अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने की व्यवस्था के कारण वास्तविक पात्र नागरिक भी जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने से वंचित हो सकते हैं। इसका सीधा असर उनके बच्चों की शिक्षा, रोजगार, आरक्षण और शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े अधिकारों पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि जाति प्रमाण पत्र केवल एक प्रशासनिक दस्तावेज नहीं, बल्कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के पात्र नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों तक पहुंच का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे वास्तविक पात्र नागरिक केवल पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण अपने अधिकारों से वंचित न हों।
सावित्री जगत ने राज्य मंत्री के समक्ष मांग रखी कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के पत्र क्रमांक 12017/3/2024-RL Cell, दिनांक 10 जून 2025 के अनुरूप छत्तीसगढ़ शासन को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। साथ ही राज्य के सभी जिला कलेक्टरों, अनुविभागीय अधिकारियों और जाति प्रमाण पत्र जारी करने वाले सक्षम अधिकारियों के लिए एक समान एवं स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित की जाए।
रामदास आठवले ने सावित्री जगत की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप छत्तीसगढ़ में जाति प्रमाण पत्र से जुड़ी समस्याओं के निराकरण के लिए आवश्यक पहल की जाएगी और समाधान का प्रयास किया जाएगा।
सावित्री जगत ने राज्य मंत्री रामदास आठवले के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के हस्तक्षेप से उन वास्तविक पात्र नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण लंबे समय से जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।