महाराष्ट्र SIR पर बॉम्बे हाईकोर्ट में बवाल, CEC ज्ञानेश कुमार के 14 आदेशों को चुनौती; हटाए गए वोटरों के नाम बहाल करने की मांग

महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर विवाद अब बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया है। महाराष्ट्र SIR प्रक्रिया से जुड़ी दो याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े 14 प्रशासनिक आदेशों को चुनौती देने, SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने और प्रक्रिया से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। दोनों मामलों में अगली सुनवाई 28 सितंबर को होने की संभावना बताई गई है।

Sep 25, 2026 - 12:16
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महाराष्ट्र SIR पर बॉम्बे हाईकोर्ट में बवाल, CEC ज्ञानेश कुमार के 14 आदेशों को चुनौती; हटाए गए वोटरों के नाम बहाल करने की मांग

UNITED NEWS OF ASIA. महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर विवाद अब बॉम्बे हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट की मुख्य पीठ और कोल्हापुर सर्किट बेंच में दो याचिकाएं दाखिल की गई हैं। याचिकाओं में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े कई प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं। इनमें से एक याचिका में पिछले 10 महीनों के दौरान लिए गए 14 प्रशासनिक आदेशों को चुनौती दी गई है। मामले की सुनवाई के लिए 28 सितंबर को याचिकाओं का उल्लेख किए जाने की संभावना है।

कोल्हापुर सर्किट बेंच में दाखिल याचिका महाराष्ट्र के मतदाताओं की ओर से अधिवक्ता असीम सरोदे के माध्यम से दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने, चुनावी डेटाबेस तथा Electoral Registration Officers से जुड़े कुछ फैसले दो अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद लिए गए। याचिकाकर्ताओं ने इन 14 प्रशासनिक कार्रवाइयों को रद्द करने या उनमें संशोधन करने, दर्ज आपत्तियों को सार्वजनिक करने और SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग की है।

याचिका में हाल में सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR समेत मतदाता सूची से जुड़े कई फैसलों पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने और बहाली, चुनावी डेटाबेस तक पहुंच तथा अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दे शामिल थे। यह मीडिया रिपोर्ट का दावा है, जिसका उल्लेख याचिका में किया गया है।

दूसरी याचिका बॉम्बे हाईकोर्ट की मुख्य पीठ में दाखिल की गई है। इसमें महाराष्ट्र में SIR लागू करने के आधार, प्रक्रिया और इससे जुड़े आदेशों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की गई है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ बूथ लेवल अधिकारियों ने मतदाताओं से दस्तावेज मांगे, जबकि याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन किया जाना चाहिए। याचिका में पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जाने की स्थिति में उन्हें बहाल करने और उचित नोटिस तथा सुनवाई का अवसर देने जैसी सुरक्षा की मांग की गई है।

याचिकाकर्ताओं ने SIR के दौरान कथित डेटा डिलीशन और सॉफ्टवेयर से जुड़ी रुकावटों की जांच के लिए रिटायर्ड हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र न्यायिक समिति बनाने की मांग भी की है। इसके अलावा, याचिकाओं में महाराष्ट्र में SIR से जुड़े निर्देशों पर रोक लगाने और नई, कानून के अनुरूप मतदाता सूची तैयार होने तक चुनावी प्रक्रिया से संबंधित कुछ राहत देने की मांग रखी गई है।

मामले में अभी अदालत का अंतिम फैसला नहीं आया है। इसलिए याचिकाओं में लगाए गए आरोपों और मांगी गई राहत को अंतिम रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। अब अदालत में होने वाली सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने के बाद इस विवाद की कानूनी स्थिति और स्पष्ट होगी।