किसानों के मुताबिक पावर ग्रिड उपकेंद्र के लिए सपिया, फगुरम और अंजोरीपाली क्षेत्र की करीब 165 एकड़ जमीन प्रस्तावित है। ग्रामीणों का दावा है कि अकेले सपिया गांव की लगभग 60 प्रतिशत कृषि भूमि इस परियोजना से प्रभावित हो सकती है। किसानों का कहना है कि क्षेत्र की जमीन खेती के लिए उपयोगी है और अनेक परिवारों की आय का प्रमुख साधन कृषि ही है। ऐसे में कृषि भूमि के अधिग्रहण से उनके सामने आजीविका से जुड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।
प्रभावित किसानों ने स्पष्ट किया कि वे पावर ग्रिड परियोजना के विरोध में नहीं हैं, लेकिन दो फसली और उपजाऊ कृषि भूमि पर परियोजना स्थापित किए जाने का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि परियोजना के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध हो सकता है, तो कृषि भूमि को बचाते हुए किसी अन्य स्थान पर उपकेंद्र स्थापित करने पर विचार किया जाना चाहिए।
किसानों ने ग्राम पंचायत की ओर से परियोजना के संबंध में विरोध प्रस्ताव पारित किए जाने का भी हवाला दिया है। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों की समस्याओं और कृषि भूमि की स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को परियोजना के लिए वैकल्पिक स्थान तलाशना चाहिए। किसानों ने कलेक्टर से मांग की है कि जब तक उनकी आपत्तियों और मांगों पर उचित विचार नहीं हो जाता, तब तक प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे न बढ़ाया जाए।
किसानों का कहना है कि खेती केवल जमीन से जुड़ा व्यवसाय नहीं है, बल्कि उनके परिवारों की आजीविका और भविष्य का आधार है। दो फसली जमीन के प्रभावित होने से कृषि उत्पादन के साथ ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ने की आशंका है। इसी वजह से किसानों ने प्रशासन से पूरे मामले की समीक्षा कर उनकी बात सुने जाने की मांग की है।
इस मामले को लेकर स्थानीय कांग्रेस विधायक रामकुमार यादव ने भी किसानों के समर्थन में बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को पर्याप्त जानकारी दिए बिना जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए तीखी राजनीतिक टिप्पणी की और भाजपा सरकार को ‘हिटलरशाही सरकार’ बताया। यह टिप्पणी विधायक के राजनीतिक आरोप के रूप में है।
अब किसानों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर है। प्रभावित ग्रामीणों ने मांग की है कि परियोजना की आवश्यकता को देखते हुए कृषि भूमि के बजाय ऐसा वैकल्पिक स्थान चिन्हित किया जाए, जिससे पावर ग्रिड परियोजना का काम भी प्रभावित न हो और किसानों की उपजाऊ जमीन तथा आजीविका भी सुरक्षित रह सके।