उन्होंने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ इसी मानवीय सोच को जनभागीदारी के माध्यम से घर-घर तक पहुंचाने का अवसर है। अभियान के जरिए शासन की योजनाओं और सेवाओं की जानकारी उन परिवारों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। परिवार और समुदाय की सक्रिय भागीदारी से महिला एवं बाल कल्याण से जुड़े प्रयासों को और प्रभावी बनाया जा सकता है।
लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं परिवार, समाज और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आज महिलाएं उद्यमिता, रोजगार और सामाजिक नेतृत्व के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रही हैं। महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता से अनेक महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं और परिवार से जुड़े खर्चों के संबंध में निर्णय लेने में सहयोग मिल रहा है। कुछ महिलाएं इस राशि से बचत कर रही हैं, जबकि कुछ इसे छोटे आजीविका प्रयासों का आधार बना रही हैं।
उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से भी महिलाएं बचत, कौशल विकास और उद्यमिता से जुड़ रही हैं। केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए कौशल, अवसर और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना भी जरूरी है। महिला जब आत्मविश्वास के साथ निर्णय लेती है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव परिवार और समाज पर भी पड़ता है।
मंत्री ने आंगनबाड़ी केंद्रों को बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा के साथ माताओं और परिवारों को आवश्यक जानकारी देने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों की सफलता केवल आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रयासों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि परिवार और समुदाय की भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है। ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ का संदेश इसी साझा दायित्व को मजबूत करने का प्रयास है।
25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक आयोजित होने वाला ‘आंगन मिलन’ कार्यक्रम परिवार और समुदाय की इस भागीदारी को और मजबूत करेगा। इस दौरान अभिभावकों और समुदाय के लोगों को आंगनबाड़ी केंद्रों की गतिविधियों से जुड़ने, बच्चों के भोजन और स्वच्छता व्यवस्था को समझने तथा पोषण से जुड़े विषयों पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि बच्चों के पोषण को लेकर परिवारों में निरंतर संवाद जरूरी है। बच्चों को उम्र के अनुसार पर्याप्त और विविध आहार उपलब्ध कराने, भोजन में स्थानीय एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करने तथा स्वच्छता की अच्छी आदतें विकसित करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। बच्चों की वृद्धि और विकास की नियमित निगरानी भी महत्वपूर्ण है। ‘बच्चों की थाली, हम सबकी जिम्मेदारी’ का संदेश इसी सामूहिक जिम्मेदारी को हर परिवार तक पहुंचाने का प्रयास है।
लक्ष्मी राजवाड़े ने सुरक्षित बचपन को भी समाज की साझा जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि बाल विवाह, बाल श्रम, हिंसा और उपेक्षा जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए केवल कानून और प्रशासनिक व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। परिवार, विद्यालय, पंचायत, आंगनबाड़ी और समुदाय को मिलकर सजग रहना होगा। बच्चों की बात सुनना, उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और जरूरत पड़ने पर समय पर सहायता उपलब्ध कराना सुरक्षित बचपन के लिए आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि सेवा संकल्प अभियान का वास्तविक उद्देश्य लोगों तक पहुंचना और उनकी जरूरतों को समझना है। किसी मां को पोषण की सही जानकारी मिलना, किसी महिला को आजीविका से जुड़ने का अवसर मिलना और किसी बच्चे को सुरक्षित एवं स्वस्थ वातावरण मिलना इस अभियान की सार्थकता को दर्शाता है।
मंत्री ने कहा कि ‘आंगन मिलन’ के माध्यम से शुरू होने वाले संवाद और सहभागिता को निरंतर बनाए रखने की आवश्यकता है। जब परिवार, समुदाय और शासन मिलकर अपनी-अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे, तभी सशक्त मातृशक्ति और सुपोषित एवं सुरक्षित बचपन के संकल्प को मजबूत आधार मिलेगा और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा।