बच्चों की थाली बनी सामूहिक जिम्मेदारी, आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण और स्वच्छता पर जोर
छत्तीसगढ़ में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के तहत ‘बच्चों की थाली, हम सबकी जिम्मेदारी’ और ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को पौष्टिक एवं स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराने के साथ अभिभावकों और समुदाय की भागीदारी बढ़ाई जा रही है। स्थानीय खाद्य पदार्थों, स्वच्छता और बच्चों के नियमित विकास की निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के अंतर्गत ‘बच्चों की थाली, हम सबकी जिम्मेदारी’ और ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पोषण अभियान और यूनिसेफ के सहयोग से प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को गर्म, ताजा, पौष्टिक और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराने के साथ समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
अभियान के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में पोस्टर और जागरूकता सामग्री के माध्यम से अभिभावकों तथा ग्रामीणों को बच्चों के भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता पर नजर रखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। भोजन किस तरह तैयार किया जा रहा है, उसमें साफ-सफाई का कितना ध्यान रखा जा रहा है, भोजन का स्वाद और पोषण मूल्य कैसा है तथा बच्चों को किस प्रकार भोजन परोसा जा रहा है, इन विषयों पर अभिभावकों और समुदाय के साथ चर्चा की जा रही है।
समुदाय को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि बच्चों के पोषण और आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था में सहभागी के रूप में जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। अभिभावक भोजन की गुणवत्ता को लेकर अपने सुझाव दे सकते हैं और आवश्यकता के अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर सुधार के प्रयास कर सकते हैं। इससे बच्चों के भोजन और केंद्र की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में सामुदायिक सहयोग बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने 12 सितंबर को राष्ट्रीय पोषण माह के अवसर पर सुपोषण रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। यह रथ विभिन्न गांवों तक पहुंचकर माताओं, परिवारों और समुदाय को संतुलित आहार, स्वच्छता और बच्चों के शुरुआती विकास के प्रति जागरूक कर रहा है।
सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से बच्चों के विकास से जुड़ी जरूरतों की समय पर पहचान, परामर्श और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ने का काम भी किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों के स्वास्थ्य और विकास से जुड़ी आवश्यकताओं को शुरुआती स्तर पर पहचानकर उन्हें उचित सहयोग उपलब्ध कराना है।
प्रदेश के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण माह के दौरान बच्चों के भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और पोषण मूल्य को बेहतर बनाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, माताओं, स्व-सहायता समूहों और स्थानीय समुदाय द्वारा मिलकर प्रयास किए जा रहे हैं। यदि किसी बच्चे द्वारा भोजन कम ग्रहण किया जाता है, तो उसकी मां और परिवार से चर्चा कर भोजन के स्वाद, सामग्री और परोसने के तरीके में आवश्यक बदलाव करने का प्रयास किया जा रहा है।
आंगनबाड़ी केंद्रों में स्थानीय और मौसमी सब्जियों, दालों तथा मिलेट जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है। भोजन तैयार करने वाली जगह की स्वच्छता, बर्तनों की साफ-सफाई और बच्चों को भोजन परोसते समय स्वच्छता के मानकों का ध्यान रखा जा रहा है। साथ ही बच्चों के नियमित वजन और विकास की निगरानी की जा रही है, ताकि उनके पोषण स्तर में होने वाले बदलावों की समय पर पहचान हो सके।
पोषण माह के दौरान अभिभावकों और ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ने से आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के भोजन को लेकर संवाद भी मजबूत हो रहा है। अब समुदाय के लोग भोजन के मेनू, गुणवत्ता और स्वच्छता के संबंध में जानकारी लेने के साथ अपने सुझाव भी दे रहे हैं। इस पहल के माध्यम से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका के साथ परिवार और समुदाय की जिम्मेदारी को भी सामने लाया जा रहा है।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने सभी जिलों को आंगनबाड़ी प्रबंधन समितियों, पंचायतों, अभिभावकों और समुदाय को पोषण संबंधी गतिविधियों में सक्रिय रूप से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक चल रहे राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों में रंग-बिरंगी थाली प्रदर्शन, पोषण मेले, माता-पिता की बैठकें, स्वच्छता अभियान और विभिन्न जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ का संदेश बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और शुरुआती विकास को सामूहिक जिम्मेदारी से जोड़ने पर केंद्रित है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, अभिभावकों, पंचायतों, स्व-सहायता समूहों और स्थानीय समुदाय की भागीदारी से बच्चों को बेहतर पोषण और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान इन गतिविधियों के जरिए पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूकता को और व्यापक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।