रेत कला, शोभायात्रा और लोक-संस्कृति से सजा राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव–2026 का भव्य शुभारंभ
आरंग में आयोजित दो दिवसीय राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव–2026 का प्रथम दिवस आस्था, इतिहास और लोक-संस्कृति के संगम के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ। रेत कला, शोभायात्रा, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और ऐतिहासिक विचार सत्रों ने महोत्सव को विशेष पहचान दी।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह,रायपुर आरंग। त्याग, बलिदान और धर्मपरायणता के प्रतीक महान राजा मोरध्वज की स्मृति में आयोजित दो दिवसीय राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव–2026 का प्रथम दिवस गुरुवार को ऐतिहासिक नगरी आरंग में आस्था, इतिहास और लोक-संस्कृति के भव्य संगम के साथ संपन्न हुआ। प्रातः से देर रात्रि तक चले विविध कार्यक्रमों ने पूरे नगर को उत्सवमय वातावरण से भर दिया।
महोत्सव की शुरुआत प्रातः 8 बजे प्रसिद्ध रेत कलाकार हेमचंद साहू द्वारा निर्मित राजा मोरध्वज की त्याग गाथा पर आधारित भव्य रेत कलाकृति से हुई। इस कलाकृति ने न केवल दर्शकों को आकर्षित किया, बल्कि महोत्सव की मूल भावना को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक बाबा बागेश्वरनाथ एवं वेदमाता गायत्री की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा चंडी मंदिर से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए नेताजी चौक पहुँची और महामाया मंदिर में जलाभिषेक उपरांत पुनः राजा मोरध्वज की परिक्रमा करते हुए कार्यक्रम स्थल इंडोर स्टेडियम पहुँची। मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया।
शाम 4 बजे बाबा बागेश्वरनाथ की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ महोत्सव का औपचारिक शुभारंभ हुआ। यह आयोजन क्षेत्रीय विधायक एवं कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की कड़ी में सुवा नृत्य पार्टी कोसमखुटा और पंथी नृत्य पार्टी कुटेशर की ऊर्जावान प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इतिहास एवं बौद्धिक सत्र में वरिष्ठ विद्वानों ने राजा मोरध्वज के त्याग और ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात स्वरांजली डांस ग्रुप की प्रस्तुति और राजा मोरध्वज की भव्य झांकी ने इतिहास को सजीव कर दिया।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि राजा मोरध्वज की त्याग और सत्य की गाथा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा का आधार है। वहीं राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने महोत्सव को आरंग की गौरवशाली विरासत को जन-जन तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बताया।
प्रथम दिवस के आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि राजा मोरध्वज का त्याग और आदर्श आज भी समाज को दिशा देने की क्षमता रखते हैं।