बिजलीकर्मियों के कौशल का कमाल: 60 साल पुरानी जर्मन रेडियल ड्रिल मशीन फिर हुई कार्यशील

छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी के इंजीनियरों और तकनीकी कर्मचारियों ने अपने कौशल और नवाचार से 1965 में जर्मनी से आयातित रेडियल ड्रिल मशीन को पुनर्जीवित कर दिया, जिससे अब ट्रांसमिशन टावर निर्माण कार्य में गति और दक्षता बढ़ेगी।

Jan 16, 2026 - 13:28
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बिजलीकर्मियों के कौशल का कमाल: 60 साल पुरानी जर्मन रेडियल ड्रिल मशीन फिर हुई कार्यशील

 UNITED NEWS OF ASIA. भूपेंद्र साहू, कोरबा | छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (CSPTCL) के इंजीनियरों एवं तकनीकी कर्मचारियों ने अपने अनुभव, कौशल और नवाचार का परिचय देते हुए लगभग 60 वर्ष पुरानी जर्मन निर्मित रेडियल ड्रिल मशीन को सफलतापूर्वक पुनः कार्यशील बना दिया है। यह मशीन वर्ष 1965 में जर्मनी से आयातित की गई थी और राज्य गठन के कुछ वर्षों बाद तकनीकी खराबी के चलते अनुपयोगी हो गई थी।

मशीन को पुनः चालू करने के लिए प्रारंभ में बाहरी विशेषज्ञों और निर्माता कंपनी से संपर्क किया गया, लेकिन अत्यधिक पुरानी तकनीक और स्पेयर पार्ट्स की अनुपलब्धता के कारण मरम्मत संभव नहीं हो सकी। इसके बाद पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी के अनुभवी तकनीकी कर्मचारियों ने स्वयं पहल करते हुए मशीन के यांत्रिक और विद्युत घटकों का गहन परीक्षण किया और चरणबद्ध तरीके से सुधार कार्य प्रारंभ किया। लगभग दो वर्षों की मेहनत के बाद मशीन को पूर्णतः कार्यशील बना दिया गया।

इस उल्लेखनीय तकनीकी उपलब्धि पर कंपनी के अध्यक्ष सुबोध कुमार सिंह एवं प्रबंध निदेशक राजेश कुमार शुक्ला ने बिजलीकर्मियों को बधाई देते हुए इसे विभागीय दक्षता, आत्मनिर्भरता और संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि आउटसोर्सिंग के दौर में इनहाउस तकनीकी प्रतिभा पर भरोसा करना एक सराहनीय पहल है।

कार्यपालक निदेशक (ट्रांसमिशन) वी.के. दीक्षित ने बताया कि इस रेडियल ड्रिल मशीन के पुनः चालू होने से अब अति उच्च दाब ट्रांसमिशन टावरों के निर्माण में उपयोग होने वाले मोटे स्टील एंगल, प्लेट और भारी संरचनात्मक सामग्री में सटीक एवं तेज ड्रिलिंग संभव हो सकेगी। इससे कार्य की गति बढ़ेगी और कम मानव संसाधन में अधिक कार्य संपन्न किया जा सकेगा।

अधीक्षण अभियंता के.के. यादव ने बताया कि यह मशीन जर्मनी की प्रसिद्ध हेवी इंडस्ट्रियल कंपनी द्वारा ट्रांसमिशन टावर के लिए डिजाइन की गई थी। यह साधारण ड्रिल मशीन नहीं, बल्कि यूरोपियन ग्रेड हेवी इंडस्ट्रियल सिस्टम है, जो 60 मिमी तक स्टील कटिंग, पंचिंग और नॉचिंग का कार्य एक साथ कर सकती है। भिलाई-03 वर्कशॉप में लगभग 20 वर्षों से बंद इस मशीन को कार्यपालन अभियंता बरखा दुबे, सहायक अभियंता आकाश सिन्हा, तकनीकी कर्मचारी शाहजहां शाह, टी. सिम्हाचलम् सहित पूरी टीम ने नया जीवन दिया है।

इस मशीन के पुनर्जीवित होने से अब बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता समाप्त होगी और समय व लागत दोनों की बड़ी बचत होगी