पुरी के बड़ादांड में उमड़ा आस्था का सैलाब, गुंडिचा मंदिर की ओर बढ़ा महाप्रभु जगन्नाथ का रथ 'नंदीघोष'

पुरी की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा के दौरान महाप्रभु जगन्नाथ का रथ 'नंदीघोष' लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में गुंडिचा मंदिर की ओर बढ़ा। देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं ने 'जय जगन्नाथ' के जयघोष के साथ रथ खींचकर आस्था और श्रद्धा का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया।

Jul 17, 2026 - 15:37
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पुरी के बड़ादांड में उमड़ा आस्था का सैलाब, गुंडिचा मंदिर की ओर बढ़ा महाप्रभु जगन्नाथ का रथ 'नंदीघोष'

UNITED NEWS OF ASIA. ओडिशा के पवित्र तीर्थ क्षेत्र पुरी में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। पुरी के ऐतिहासिक बड़ादांड पर महाप्रभु जगन्नाथ का भव्य रथ 'नंदीघोष' लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में धीरे-धीरे गुंडिचा मंदिर की ओर अग्रसर है। रथ के आगे बढ़ते ही पूरा वातावरण "जय जगन्नाथ" के जयघोष से गूंज उठा और श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा है।

रथ यात्रा के मार्ग के दोनों ओर श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा है। ओडिशा के विभिन्न जिलों के अलावा देश और विदेश से पहुंचे लाखों भक्त अपने आराध्य महाप्रभु जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा के दर्शन के लिए घंटों से प्रतीक्षा कर रहे हैं। श्रद्धालु महाप्रभु के दिव्य स्वरूप की एक झलक पाने को अपने जीवन का सौभाग्य मान रहे हैं।

बड़ादांड पर इस समय ऐसा दृश्य है, जहां हर ओर केवल भक्ति और विश्वास का माहौल दिखाई दे रहा है। जाति, धर्म और भाषा की सीमाओं से परे लाखों श्रद्धालु एक साथ रथ की रस्सी पकड़कर उसे खींचने का प्रयास कर रहे हैं। धार्मिक मान्यता है कि महाप्रभु के रथ को खींचने और उनके दर्शन करने से भक्तों के जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा उन्हें पुण्य की प्राप्ति होती है।

महाप्रभु जगन्नाथ का रथ 'नंदीघोष' पीले और लाल रंग के वस्त्रों से आकर्षक रूप से सजाया गया है। लगभग 45 फीट ऊंचे इस विशाल रथ को खींचने के लिए हर वर्ष श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिलता है। भगवान बलभद्र के 'तालध्वज' और माता सुभद्रा के 'दर्पदलन' रथ भी श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

धार्मिक परंपरा के अनुसार महाप्रभु जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा रथ यात्रा के दौरान सात दिनों के लिए गुंडिचा मंदिर में प्रवास करते हैं। इस दौरान विशेष पूजा-अर्चना, भोग और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में गुंडिचा मंदिर पहुंचकर महाप्रभु के दर्शन का लाभ प्राप्त करते हैं।

रथ यात्रा के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर पुरी प्रशासन एवं पुलिस पूरी तरह सतर्क है। लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं, ताकि दर्शन और यात्रा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। चिकित्सा, यातायात, आपातकालीन सेवाओं और स्वयंसेवकों की विशेष व्यवस्था भी की गई है।

विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता और आस्था का विराट प्रतीक मानी जाती है। हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालु इस महापर्व का हिस्सा बनकर महाप्रभु जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और "जय जगन्नाथ" के उद्घोष के साथ भक्ति की इस अनूठी परंपरा में सहभागी बनते हैं।