राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने पर जॉर्ज कुरियन ने दिया इस्तीफा, राष्ट्रपति ने किया स्वीकार

केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपने राज्यसभा कार्यकाल की समाप्ति के बाद मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। हालिया राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा था।

Jun 23, 2026 - 13:37
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राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने पर जॉर्ज कुरियन ने दिया इस्तीफा, राष्ट्रपति ने किया स्वीकार

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। केंद्र सरकार में राज्य मंत्री रहे जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। जॉर्ज कुरियन अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के साथ-साथ मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे थे।

जानकारी के अनुसार जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो गया था। हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजने का निर्णय नहीं लिया। राज्यसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा सौंप दिया, जिसे तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया।

जॉर्ज कुरियन केंद्र सरकार में ईसाई समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल थे। उन्हें वर्ष 2024 में राज्यसभा के माध्यम से संसद में लाया गया था और इसके बाद केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया था। उन्होंने 9 जून 2024 को केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली थी और 11 जून 2024 को अपने मंत्रालयों का कार्यभार संभाला था।

कुरियन मूल रूप से केरल के कोट्टायम जिले के निवासी हैं। उनका जन्म 20 सितंबर 1960 को हुआ था। उन्होंने कानून की पढ़ाई की और बाद में सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता के रूप में भी कार्य किया। सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाईं।

राजनीतिक जीवन में उन्होंने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। इसके अलावा वे पूर्व केंद्रीय रेल राज्य मंत्री ओ. राजगोपाल के विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) भी रह चुके हैं। भाजपा संगठन और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच संवाद बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती रही है।

राज्यसभा सदस्यता समाप्त होने के साथ ही उनका मंत्री पद पर बने रहना संवैधानिक रूप से संभव नहीं था। यही कारण है कि उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा द्वारा उन्हें दोबारा राज्यसभा नहीं भेजने के निर्णय के पीछे संगठनात्मक और राजनीतिक रणनीति हो सकती है।

इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल भी समाप्त हो चुका है। वे राजस्थान से राज्यसभा सदस्य थे। हालांकि वर्तमान में बिट्टू मंत्री पद पर बने हुए हैं और उनके भविष्य को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के बाद अब यह चर्चा शुरू हो गई है कि केंद्र सरकार में उनकी जगह किसे जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। फिलहाल सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। राजनीतिक हलकों की नजर अब संभावित मंत्रिमंडलीय फेरबदल और नई नियुक्तियों पर टिकी हुई है।