अमरवाड़ा अस्पताल में सुविधाओं का संकट, सामाजिक संगठनों ने उठाई डॉक्टरों और उपकरणों की मांग

अमरवाड़ा के 100 बिस्तर वाले सिविल अस्पताल में डॉक्टरों, स्टाफ और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की कमी को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से हस्तक्षेप की मांग की है। संगठनों ने अस्पताल में सोनोग्राफी, ईसीजी मशीन, ऑक्सीजन प्लांट और रिक्त पदों को जल्द भरने की अपील की है।

Aug 7, 2026 - 15:19
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अमरवाड़ा अस्पताल में सुविधाओं का संकट, सामाजिक संगठनों ने उठाई डॉक्टरों और उपकरणों की मांग

UNITED NEWS OF ASIA. यज्ञ राज पटेल, छिंदवाड़ा l मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के अमरवाड़ा स्थित 100 बिस्तर वाले सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर स्थानीय सामाजिक संगठनों ने चिंता जताई है। संगठनों का कहना है कि उपचुनाव के दौरान अस्पताल की सुविधाओं को बेहतर बनाने के जो आश्वासन दिए गए थे, वे अब तक धरातल पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। अस्पताल में डॉक्टरों की कमी, आवश्यक चिकित्सा उपकरणों का अभाव और अधूरी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के कारण मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

नटनी माई सेवा समिति, योग पतंजलि समिति, गोलक्ष्मी टीम, प्रगति सोपान समिति, आशवी फाउंडेशन और तहसील प्रेस क्लब सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने संयुक्त रूप से मुख्यमंत्री मोहन यादव से अस्पताल में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। संगठनों ने विशेष रूप से महिला चिकित्सक की नियुक्ति, सोनोग्राफी मशीन, ईसीजी मशीन और रिक्त पदों को शीघ्र भरने की अपील की है।

बताया गया कि अमरवाड़ा सिविल अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 500 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल केवल नगर ही नहीं, बल्कि लगभग 200 से 250 गांवों के लोगों के लिए प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है। वर्तमान में बीएमओ सहित केवल तीन चिकित्सक बड़ी संख्या में आने वाले मरीजों का उपचार कर रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।

सामाजिक संगठनों का कहना है कि अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर, विशेषज्ञ चिकित्सक, स्टाफ नर्स, ड्रेसर, वार्ड बाय, सफाई कर्मचारी, नेत्र चिकित्सक और तकनीकी कर्मचारियों सहित अनेक पद वर्षों से स्वीकृत हैं, लेकिन अब तक इन पर नियुक्तियां नहीं की गई हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण कई मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद छिंदवाड़ा रेफर करना पड़ता है।

अस्पताल में आधुनिक सुविधाओं के लिए आवश्यक भवन और कई विभाग मौजूद हैं। यहां आईसीयू, ब्लड बैंक, लेबर रूम, ऑपरेशन थिएटर, नवजात शिशु वार्ड, कुपोषित बच्चों के लिए वार्ड तथा अलग-अलग विभागों के लिए कक्ष बनाए गए हैं। इसके बावजूद विशेषज्ञों और तकनीकी कर्मचारियों के अभाव में कई सुविधाएं पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो पा रही हैं। 10 बिस्तरों वाला नेत्र अस्पताल भी बंद पड़ा हुआ है।

संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में स्थापित किया गया ऑक्सीजन प्लांट अधूरा रह गया और अब उपयोग के बजाय अनुपयोगी स्थिति में पहुंच गया है। इसके अलावा अस्पताल को उपलब्ध कराए गए दो वेंटिलेटरों का भी उपयोग नहीं हो रहा है। वहीं सोनोग्राफी और ईसीजी मशीन नहीं होने से मरीजों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं और हृदय रोगियों को 40 से 50 किलोमीटर दूर छिंदवाड़ा जाना पड़ता है।

सामाजिक संगठनों ने राज्य सरकार से मांग की है कि अमरवाड़ा सिविल अस्पताल में रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां की जाएं, आवश्यक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं और अधूरी स्वास्थ्य परियोजनाओं को पूरा कर क्षेत्र की जनता को बेहतर एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।