सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को जरूरतमंदों तक पहुंचाने के प्रयासों को भी गति मिली है। चिरायु दल स्कूलों, छात्रावासों, आश्रमों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पहुंचकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच कर रहे हैं। जांच के दौरान गंभीर बीमारी या जन्मजात विकृति के लक्षण मिलने पर बच्चों को आगे की जांच और उपचार के लिए चिरायु वाहन से शासन द्वारा अनुबंधित अस्पतालों तक पहुंचाया जाता है। जरूरत पड़ने पर राज्य के बाहर स्थित अनुबंधित अस्पतालों में भी निःशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिले के शासकीय प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों, अनुदान प्राप्त विद्यालयों, आवासीय विद्यालयों, आश्रमों एवं छात्रावासों में अध्ययनरत बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जाती है। इसके साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों की भी जांच होती है। चिरायु दल में चिकित्सक, फार्मासिस्ट, लैब टेक्निशियन और एएनएम शामिल होते हैं। विद्यालयों में वर्ष में एक बार तथा आंगनबाड़ी केंद्रों में वर्ष में दो बार स्वास्थ्य जांच, परामर्श और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाता है।
जांच के दौरान किसी बच्चे में गंभीर बीमारी या जन्मजात विकृति की पहचान होने पर उसे आवश्यक जांच एवं उपचार के लिए विशेषज्ञ अस्पताल भेजा जाता है। चिरायु वाहन के माध्यम से बच्चों को अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाती है। शासन द्वारा अनुबंधित शासकीय एवं निजी अस्पतालों में उपचार की सुविधा मिलने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बच्चों के महंगे इलाज का अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ता।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सलिल मिश्रा के अनुसार, छोटे बच्चों में हृदय रोग के कुछ संकेत शुरुआती स्तर पर दिखाई दे सकते हैं। दूध पीने में परेशानी, फीडिंग के दौरान जल्दी थकना या हांफना, दूध पीते अथवा रोते समय अधिक पसीना आना, होंठ, जीभ या नाखूनों का नीला अथवा बैंगनी पड़ना, पर्याप्त भोजन के बावजूद वजन और शारीरिक विकास में अपेक्षित वृद्धि नहीं होना तथा आराम या नींद के दौरान भी तेज सांस चलना ऐसे लक्षण हैं, जिन पर अभिभावकों को ध्यान देना चाहिए।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों में इस तरह के लक्षण दिखाई देने पर उन्हें सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें। समय पर चिकित्सकीय परामर्श और जांच से बीमारी की जल्द पहचान संभव है और जरूरत के अनुसार उपचार कराया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि जिले के दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों तक भी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचें।
चिरायु कार्यक्रम के माध्यम से समय पर स्वास्थ्य जांच, बीमारी की शीघ्र पहचान और निःशुल्क उपचार की व्यवस्था बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण में मददगार साबित हो रही है। जन्मजात एवं गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों को उपचार उपलब्ध कराने के साथ यह पहल उनके परिवारों को इलाज के आर्थिक बोझ से राहत देने में भी सहायक है।