नाबालिग मामले में धमधा पुलिस पर लापरवाही के आरोप, एसपी बोले- जांच में दोषी मिले तो होगी सख्त कार्रवाई

दुर्ग जिले के धमधा थाना क्षेत्र में नाबालिग युवती के लापता होने और बरामदगी के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। परिजनों ने पुलिस पर नियमानुसार कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। वहीं पुलिस अधीक्षक ने मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा देते हुए कहा है कि लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Aug 7, 2026 - 19:54
 0  2
नाबालिग मामले में धमधा पुलिस पर लापरवाही के आरोप, एसपी बोले- जांच में दोषी मिले तो होगी सख्त कार्रवाई

UNITED NEWS OF ASIA.हेमंत पाल, धमधा l 07 अगस्त 2026। दुर्ग जिले के धमधा थाना क्षेत्र में एक नाबालिग युवती के लापता होने और बाद में बरामद होने का मामला अब पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवालों के केंद्र में आ गया है। युवती के परिजनों ने आरोप लगाया है कि बरामदगी के बाद भी पुलिस ने कानून के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई नहीं की और मामले को गंभीरता से नहीं लिया। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि पूरे प्रकरण की विवेचना जारी है तथा जांच पूरी होने के बाद ही तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

जानकारी के अनुसार, लगभग एक सप्ताह पहले नाबालिग युवती के लापता होने पर परिजनों ने धमधा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 173 के तहत गुमशुदगी का मामला दर्ज कर युवती की तलाश शुरू की। कुछ दिनों बाद पुलिस ने युवती को एक युवक के साथ बरामद कर लिया।

युवती के बरामद होने के बाद मामला विवादों में आ गया। परिजनों का आरोप है कि युवक के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि पुलिस ने उन्हें यह कहते हुए आगे कार्रवाई नहीं करने की सलाह दी कि इससे युवती की बदनामी हो सकती है। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि बरामदगी के बाद युवती को दोबारा उसी युवक के साथ भेज दिया गया, जहां वह चार दिन तक रही। बाद में विरोध और शिकायत के पश्चात पुलिस ने युवती को वापस बुलाकर परिजनों के सुपुर्द कर दिया।

इन आरोपों के बाद कई महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न भी सामने आए हैं। यदि युवती नाबालिग थी, तो क्या उसका चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया? क्या उसे बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) अथवा सक्षम न्यायिक प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया? क्या मामले की परिस्थितियों के अनुसार अपहरण, यौन अपराध या पॉक्सो अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज करने की आवश्यकता थी? इन बिंदुओं पर अब तक पुलिस की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

दुर्ग पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच के दौरान किसी भी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित के विरुद्ध सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

वहीं धमधा थाना प्रभारी महेंद्र कुमार ध्रुव ने बताया कि वे वर्तमान में अवकाश पर हैं तथा मामले की विवेचना एएसआई राजेंद्र बघेल द्वारा की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले मामले के तथ्यों पर विस्तृत टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।

फिलहाल यह मामला केवल एक गुमशुदगी की घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि नाबालिगों से जुड़े संवेदनशील मामलों में पुलिस द्वारा कानूनी प्रक्रिया के पालन को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि परिजनों के आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला बन सकता है, वहीं यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो पुलिस को भी जांच के निष्कर्षों के आधार पर अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।