सोनिया गांधी के वोटर लिस्ट मामले में नया मोड़, कोर्ट ने मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द कर दोबारा सुनवाई के दिए निर्देश
सोनिया गांधी के मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने से जुड़े मामले में दिल्ली की अदालत ने मजिस्ट्रेट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें FIR की मांग वाली शिकायत पर जांच से इनकार किया गया था। कोर्ट ने मामले को वापस ACJM के पास भेजते हुए शिकायत पर नए सिरे से सुनवाई और कारणों सहित आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी का आरोप है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 की मतदाता सूची में शामिल था, जबकि उन्हें भारतीय नागरिकता 1983 में मिली थी।
UNITED NEWS OF ASIA. कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने से जुड़े मामले में दिल्ली की अदालत ने 21 सितंबर 2026 को महत्वपूर्ण आदेश दिया है। राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने उस मजिस्ट्रेट आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने और मामले की जांच की मांग वाली शिकायत को खारिज कर दिया गया था। अदालत ने मामले को वापस ACJM अदालत भेजते हुए शिकायत पर नए सिरे से सुनवाई करने और सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद कारणों सहित नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली कार्यवाही 29 सितंबर को होने की बात सामने आई है।
यह मामला वकील विकास त्रिपाठी की ओर से दायर शिकायत और बाद में दाखिल की गई रिवीजन याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि सोनिया गांधी का नाम वर्ष 1980 की मतदाता सूची में शामिल किया गया था, जबकि उन्हें भारतीय नागरिकता वर्ष 1983 में मिली थी। इसी आधार पर शिकायत में मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने की प्रक्रिया की जांच और FIR दर्ज करने की मांग की गई थी। यह आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के तहत विचाराधीन है और अदालत के ताजा आदेश से आरोपों की सत्यता पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है।
इस शिकायत पर सितंबर 2025 में मजिस्ट्रेट अदालत ने FIR दर्ज करने की मांग को स्वीकार नहीं किया था। इसके बाद याचिकाकर्ता ने उस आदेश को चुनौती देते हुए सेशंस कोर्ट में रिवीजन याचिका दाखिल की। 21 सितंबर को विशेष अदालत ने मजिस्ट्रेट के आदेश की समीक्षा करते हुए उसे रद्द कर दिया और मामले को दोबारा ACJM अदालत में भेज दिया। अदालत ने कहा कि पहले दिए गए आदेश में पर्याप्त कारण स्पष्ट नहीं किए गए थे और शिकायत में लगाए गए आरोपों के मूल पहलू पर उचित तरीके से विचार नहीं किया गया।
अदालत की ओर से यह भी कहा गया कि मजिस्ट्रेट को शिकायत में किसी संज्ञेय अपराध के सामने आने के सवाल पर विचार करना था। रिपोर्टों के मुताबिक, विशेष अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि पहले की कार्यवाही में पुलिस पक्ष की बात सुनने और संबंधित पुलिस थाने से स्थिति रिपोर्ट मंगाने जैसी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर मामले को नए सिरे से विचार के लिए वापस भेजा गया है। अब ACJM अदालत को शिकायतकर्ता और पुलिस पक्ष की दलीलें सुनने के बाद कानून के अनुरूप नया आदेश पारित करना होगा।
याचिकाकर्ता की ओर से उठाया गया मुख्य सवाल मतदाता सूची में कथित तौर पर नाम शामिल किए जाने की तारीख और सोनिया गांधी की नागरिकता प्राप्त करने की तारीख के बीच के अंतर से जुड़ा है। शिकायत में दावा किया गया है कि यदि 1980 की मतदाता सूची में नाम दर्ज था, तो उस समय मतदाता के रूप में पात्रता से जुड़े नियमों और दस्तावेजों की जांच की जानी चाहिए। अदालत ने फिलहाल इन आरोपों को सही या गलत घोषित नहीं किया है, बल्कि निचली अदालत के आदेश की कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी कमियों के आधार पर मामले को फिर से सुनने का निर्देश दिया है।
इस आदेश के बाद मामला एक बार फिर मजिस्ट्रेट अदालत के सामने पहुंच गया है। 29 सितंबर को होने वाली अगली कार्यवाही में शिकायत पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। फिलहाल सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज होने का कोई अदालत का आदेश नहीं हुआ है। ताजा फैसला केवल पहले के आदेश को रद्द कर मामले की नए सिरे से सुनवाई का रास्ता खोलता है।