धनतेरस 2026: आज से शुरू होगा पांच दिवसीय दीप उत्सव, जानें यम दीपक जलाने का शुभ मुहूर्त, विधि और धार्मिक महत्व
धनतेरस के साथ पांच दिवसीय दीपावली उत्सव की शुरुआत हो रही है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस की शाम यमराज के निमित्त यम दीपक जलाने से परिवार के सदस्यों की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। जानिए यम दीपक जलाने का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसका धार्मिक महत्व।
UNITED NEWS OF ASIA. कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला धनतेरस का पर्व आज 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। इसी के साथ पांच दिवसीय दीपावली महापर्व की शुरुआत हो रही है। धनतेरस का त्योहार भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा-अर्चना के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन सोना, चांदी और नए बर्तन खरीदने की भी परंपरा है। इसके अलावा धनतेरस की शाम यमराज के नाम दीपक जलाने का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है।
धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट से शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगी।
धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 2 मिनट से रात 7 बजकर 57 मिनट तक निर्धारित है। वहीं प्रदोष काल शाम 5 बजकर 33 मिनट से रात 8 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। इस दौरान भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जा सकती है। यम दीपदान के लिए भी प्रदोष काल को विशेष महत्व दिया गया है।
स्कंद पुराण में बताया गया है यम दीपदान का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्कंद पुराण के कार्तिक माहात्म्य में यम दीपदान का उल्लेख मिलता है। इसमें बताया गया है कि कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि को संध्या के समय यमराज के निमित्त दीपदान करना शुभ माना जाता है।
मान्यता है कि धनतेरस की शाम यमराज के नाम दीपक जलाने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। इस परंपरा के माध्यम से परिवार की सुख-शांति, अच्छी सेहत और लंबी आयु की कामना की जाती है।
कैसे तैयार करें यम दीपक?
यम दीपक तैयार करने के लिए गेहूं के आटे का इस्तेमाल किया जाता है। आटे में थोड़ा पानी मिलाकर चौमुखी दीपक का आकार बनाया जाता है। इसके बाद इसमें सरसों का तेल भरकर रुई की चार बत्तियां लगाई जाती हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार, दीपक में काले तिल डालने का भी विधान बताया गया है।
दीपक तैयार करने के बाद संध्या के समय इसे प्रज्वलित किया जाता है। पूजा के दौरान परिवार की खुशहाली और मंगल जीवन की कामना की जाती है।
दक्षिण दिशा में जलाया जाता है यम दीपक
धार्मिक मान्यताओं में यमराज को दक्षिण दिशा का अधिपति माना गया है। इसी कारण यम दीपदान करते समय दक्षिण दिशा का विशेष ध्यान रखा जाता है। परंपरा के अनुसार, घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक रखा जाता है।
दीपक जलाते समय यमराज से परिवार के सभी सदस्यों की रक्षा, अच्छी सेहत और लंबी आयु की प्रार्थना की जाती है।
धनतेरस पर क्यों खास है यम दीपदान?
धनतेरस केवल धन और समृद्धि की पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह परिवार की सुख-शांति और मंगल जीवन की कामना से भी जुड़ा हुआ है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा स्वास्थ्य और आरोग्य के लिए, माता लक्ष्मी की पूजा सुख-समृद्धि के लिए और भगवान कुबेर की पूजा धन-वैभव के लिए की जाती है।
वहीं यम दीपदान की परंपरा परिवार की सुरक्षा और लंबी आयु की मंगलकामना का प्रतीक मानी जाती है। इस तरह धनतेरस का पर्व धार्मिक आस्था, परंपरा और दीपदान के विशेष महत्व के साथ दीपावली उत्सव का शुभारंभ करता है।