तुरंगा गुरुकुल में 325 से अधिक शिक्षकों का सम्मान, शिक्षा और संस्कार का दिया संदेश
रायगढ़ के आर्ष गुरुकुल आश्रम तुरंगा में शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न संकुलों, शासकीय-अशासकीय विद्यालयों और महाविद्यालयों से 325 से अधिक शिक्षकों ने सहभागिता की। डीपीआई संचालक अशोक नारायण बंजारा सहित शिक्षा और समाज से जुड़े अतिथियों ने शिक्षकों की भूमिका और संस्कारयुक्त शिक्षा के महत्व पर विचार रखे।
UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र अग्रवाल, रायगढ़ l श्री श्री मल्लिका चतुर्भुज धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा संचालित आर्ष गुरुकुल आश्रम तुरंगा में शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में जिले के विभिन्न संकुलों के साथ शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों तथा महाविद्यालयों से 325 से अधिक शिक्षकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में शिक्षा जगत और समाज से जुड़े अनेक विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे। समारोह के माध्यम से शिक्षकों के योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ शिक्षा में संस्कार, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी के महत्व पर चर्चा की गई।
शिक्षक सम्मान समारोह में पुसौर, कन्या, तुरंगा, महलोई, छपोरा, तेलीपाली, उमरिया, कोड़पाली, गोरा, बुलाकी, बड़े भंडार, डुमरमुड़ा, सोढ़ेकेला, सूरी, सुपा, मिहमिड़ा, रेंगलपाली, झलमला, हल्दी, तेतला, जतरी, पुसल्दा, गदुमरिया और कोड़ातराई सहित विभिन्न संकुलों से शिक्षक पहुंचे। इसके अलावा विशेष शिक्षक, सेवानिवृत्त शिक्षक, अशासकीय विद्यालयों और महाविद्यालयों से जुड़े शिक्षक भी समारोह में शामिल हुए। सारंगढ़-बिलाईगढ़ और बरमकेला क्षेत्र से भी लगभग 50 शिक्षकों की सहभागिता रही।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीपीआई संचालक अशोक नारायण बंजारा का आर्ष गुरुकुल तुरंगा की ओर से सम्मान किया गया। शिक्षा जगत और समाज से जुड़े अन्य अतिथियों का भी सम्मान किया गया। गुरुकुल के संचालक आचार्य राकेश कुमार ने मुख्य अतिथि सहित उपस्थित अतिथियों का स्वागत और सम्मान किया। समारोह में शिक्षकों तथा अतिथियों के प्रति संस्था की ओर से कृतज्ञता व्यक्त की गई।
आचार्य राकेश कुमार ने गुरुकुल की गतिविधियों और उद्देश्यों की जानकारी देते हुए संस्कारित शिक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार, चरित्र, अनुशासन, राष्ट्रभावना और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी आवश्यक है। उन्होंने महर्षि दयानंद सरस्वती के आदर्शों और वैदिक मूल्यों के अनुरूप शिक्षा को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। साथ ही उन्होंने कार्यक्रम में पहुंचे शिक्षकों, ग्रामीणों, अतिथियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
समारोह को मुख्य अतिथि अशोक नारायण बंजारा, जिला शिक्षा अधिकारी एल.एन. पटेल, टीआरएन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधक वायुनंदन पांडेय, डॉ. रामकुमार पटेल और विकासखंड शिक्षा अधिकारी भुवनेश्वर पटेल ने संबोधित किया। वक्ताओं ने शिक्षक को समाज निर्माण की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में उनकी भूमिका पर विचार रखे। उन्होंने शिक्षा के साथ संस्कार और सामाजिक मूल्यों को विद्यार्थियों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
आयोजन को सफल बनाने में गुरुकुल के शिक्षकों और सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्राचार्य राजेंद्र कुमार आर्य के साथ मुकेश कुमार, शेष कुमार, रश्मि गुप्ता, आकृति प्रधान, रितु स्वर्णकार, रितु गुप्ता, हरि टंडन, प्रियांशु साहू, मानसी साहू, अंजू प्रधान और विजय आर्य सहित अन्य शिक्षकों ने व्यवस्थाओं में सहयोग किया।
कार्यक्रम में आचार्य राकेश कुमार, जगन्नाथ प्रधान, घनश्याम पटेल, धर्मेंद्र प्रधान, पंकज कुमार विश्वास, दिलीप कुमार नायक, टिकेश्वर प्रधान, रमेश प्रधान, सुरेश बौसी, जाजला सिदार, मनोज गुप्ता, रामलाल विश्वास और चंद्रमणि राणा सहित अन्य सहयोगियों का भी योगदान रहा। समारोह के बाद अतिथियों, शिक्षकों और ग्रामीणों ने प्रसाद रूपी भोजन ग्रहण किया। बड़ी संख्या में शिक्षकों और ग्रामीणों की उपस्थिति से आयोजन को व्यापक सहभागिता मिली। आर्ष गुरुकुल तुरंगा का यह कार्यक्रम शिक्षकों के सम्मान के साथ मूल्यपरक और संस्कारित शिक्षा के संदेश को आगे बढ़ाने का माध्यम बना।