सिम्स बिलासपुर में इन्फर्टिलिटी, आईवीएफ और एआरटी पर जीनोविया–आईएसएआर कार्यशाला आयोजित
सिम्स बिलासपुर के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में GENOVIA–ISAR के तहत इन्फर्टिलिटी, आईवीएफ और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विशेषज्ञों ने आधुनिक प्रजनन चिकित्सा, नवीनतम उपचार पद्धतियों और वैज्ञानिक तकनीकों पर व्याख्यान दिए। कार्यक्रम में चिकित्सकों, पीजी विद्यार्थियों और मेडिकल छात्रों ने भाग लिया।
UNITED NEWS OF ASIA. बिलासपुर l छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) एवं चिकित्सालय, बिलासपुर के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग द्वारा GENOVIA–ISAR के अंतर्गत इन्फर्टिलिटी, इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) विषय पर एक दिवसीय वैज्ञानिक कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सकों, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और मेडिकल छात्रों को प्रजनन चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम वैज्ञानिक विकास, आधुनिक उपचार पद्धतियों और तकनीकी प्रगति की जानकारी देना था।
कार्यक्रम में सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह, नोडल अधिकारी डॉ. भूपेंद्र कश्यप तथा प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता रमण जोगी उपस्थित रहे। कार्यशाला का समन्वय डॉ. वेरोनिका ने किया, जिनके नेतृत्व में कार्यक्रम का सफल संचालन हुआ।
कार्यशाला के दौरान सिम्स की डॉ. दीपिका सिंह, डॉ. रचना जैन, डॉ. सोमा वेंकट, डॉ. सौम्या दर्शन, डॉ. प्रतिभा सिंह और डॉ. प्राची तिवारी ने इन्फर्टिलिटी, आईवीएफ और एआरटी से जुड़े विभिन्न वैज्ञानिक विषयों पर विस्तृत जानकारी दी। वहीं बिलासपुर से डॉ. रश्मि शर्मा, डॉ. संगीता शर्मा, डॉ. गीतिका शर्मा और डॉ. इंदुबाला मिंज ने आधुनिक प्रजनन चिकित्सा के विभिन्न पहलुओं पर अपने अनुभव साझा किए।
रायपुर से आए विशेषज्ञों में रायपुर मेडिकल कॉलेज की प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योति जायसवाल, डॉ. वेरोनिका और डॉ. मोनिका ने आधुनिक आईवीएफ तकनीक, असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी, जटिल बांझपन के मामलों के प्रबंधन तथा नवीनतम उपचार पद्धतियों पर व्याख्यान दिए। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के प्रश्नों का उत्तर भी दिया और व्यावहारिक अनुभव साझा किए।
कार्यशाला में सिम्स के पीजी रेजिडेंट्स, एमबीबीएस अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के अलावा अपोलो हॉस्पिटल और रेलवे हॉस्पिटल के डीएनबी विद्यार्थियों ने भी सक्रिय भागीदारी की। प्रतिभागियों ने आधुनिक प्रजनन चिकित्सा से जुड़ी नई तकनीकों और उपचार पद्धतियों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता रमण जोगी ने कहा कि वर्तमान समय में इन्फर्टिलिटी की समस्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन आधुनिक चिकित्सा और एआरटी तकनीकों के माध्यम से अधिकांश दंपत्तियों को सफल उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम चिकित्सकों और विद्यार्थियों के ज्ञान तथा कौशल को अद्यतन रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए इस प्रकार की वैज्ञानिक कार्यशालाएं अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान भविष्य में भी राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों के सहयोग से ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा, ताकि चिकित्सकों को नवीनतम चिकित्सा तकनीकों का लाभ मिले और प्रदेशवासियों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।