रिपोर्टों के अनुसार, पराग शाह ने यह प्रयोग जैन आध्यात्मिक गुरु नम्रमुनि की सलाह पर किया। इसके लिए उन्होंने अपनी सामान्य सुरक्षा व्यवस्था, गाड़ियों और महंगी वस्तुओं से दूरी बनाई। इसके बाद मेकअप और वेशभूषा की मदद से अपना रूप बदला, ताकि घाटकोपर में मौजूद लोग उन्हें पहचान न सकें। शाह कई घंटे तक आम लोगों के बीच भिखारी के रूप में रहे और सड़क किनारे बैठकर राहगीरों से मदद मांगने का अनुभव लिया। उनका कहना है कि इस दौरान उन्होंने लोगों के व्यवहार को एक अलग नजरिए से देखने का मौका पाया।
इस प्रयोग के दौरान कुछ लोगों ने शाह की मदद की, जबकि कई लोग उन्हें नजरअंदाज करते हुए आगे निकल गए। रिपोर्टों में शाह के हवाले से बताया गया है कि एक व्यक्ति ने उन्हें खाने के लिए 20 रुपये दिए। एक समोसा बेचने वाले ने पैसे नहीं होने की बात सुनकर उन्हें बिना शुल्क के खाना भी दिया। शाह ने इस अनुभव को मुंबई के लोगों की मदद करने की प्रवृत्ति से जोड़ते हुए बताया कि आम परिस्थितियों में किसी व्यक्ति की सामाजिक पहचान और आर्थिक स्थिति से अलग होकर लोगों की प्रतिक्रिया देखना उनके लिए सीखने वाला अनुभव रहा।
मेकअप हटाने के बाद शाह कुछ उन्हीं स्थानों पर दोबारा पहुंचे, जहां उन्होंने भिखारी के रूप में समय बिताया था। इससे उन्हें उन लोगों की प्रतिक्रियाओं को अलग नजरिए से देखने का अवसर मिला, जो कुछ समय पहले उनकी असली पहचान से अनजान थे। शाह के अनुसार, इस पूरे अनुभव ने उन्हें यह समझने में मदद की कि सामाजिक पहचान, पद और आर्थिक स्थिति के बिना किसी व्यक्ति के प्रति लोगों का व्यवहार किस तरह बदल सकता है। इसी वजह से उन्होंने इसे केवल वेश बदलने की घटना के बजाय जीवन और समाज को समझने का एक अनुभव बताया।
पराग शाह की संपत्ति भी इस पूरे मामले को खास बनाती है। 2024 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल हलफनामे में उन्होंने 3,383 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घोषित की थी। वह रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े हैं और महाराष्ट्र के सबसे अधिक संपत्ति घोषित करने वाले राजनीतिक चेहरों में शामिल रहे हैं। विधानसभा में पहुंचने से पहले वह बृहन्मुंबई महानगरपालिका में पार्षद के रूप में भी काम कर चुके हैं। ऐसे में करोड़ों की संपत्ति वाले विधायक का आम भिखारी की तरह सड़क पर बैठना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।
पराग शाह का यह प्रयोग सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाओं के साथ चर्चा में है। हालांकि शाह ने इसे किसी राजनीतिक प्रचार या सार्वजनिक कार्यक्रम के बजाय व्यक्तिगत अनुभव और आध्यात्मिक सीख से जुड़ा प्रयोग बताया है। उनके मुताबिक, इस अनुभव का उद्देश्य लोगों के जीवन, मदद की भावना और सामाजिक व्यवहार को करीब से समझना था। इसके चलते घाटकोपर की सड़कों पर भिखारी के रूप में नजर आए भाजपा विधायक का वीडियो अब महाराष्ट्र ही नहीं, देशभर में चर्चा का विषय बन गया है।