याचिकाकर्ता वर्तमान में रायगढ़ जिले में आबकारी विभाग में हेड कांस्टेबल के पद पर पदस्थ हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति नजदीक होने का हवाला देते हुए रायगढ़ से बिलासपुर तबादले की मांग की थी। याचिका में वर्ष 2025 की ट्रांसफर पॉलिसी के क्लॉज 3.12 का लाभ दिए जाने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि उनकी नियुक्ति 19 अप्रैल 1993 को आबकारी विभाग में सेल्समैन के रूप में हुई थी। बाद में उन्हें नियमित करते हुए आबकारी आरक्षक के पद पर नियुक्त किया गया।
याचिका में बताया गया कि वर्ष 2014 में उनका तबादला कोरबा से बिलासपुर किया गया था। इसके बाद 24 जून 2022 को उन्हें बिलासपुर से रायगढ़ भेजा गया। वर्ष 2023 में पदोन्नति के बाद भी उनकी पदस्थापना रायगढ़ में ही बनी रही। याचिकाकर्ता के मुताबिक अब उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख करीब आने के कारण उन्होंने गृह जिले बिलासपुर में पोस्टिंग की मांग की थी।
अदालत के समक्ष याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि वह जुलाई 2027 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। इसके अलावा उनकी पत्नी का स्वास्थ्य खराब होने और लगातार उपचार चलने की बात भी याचिका में रखी गई। याचिकाकर्ता के अनुसार उन्होंने गृह जिले में पदस्थापना के लिए विभाग के समक्ष कई बार अभ्यावेदन प्रस्तुत किए, लेकिन उन पर अपेक्षित निर्णय नहीं लिया गया। इसी के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध किया गया। सरकार ने दलील दी कि 5 जून 2025 की ट्रांसफर पॉलिसी आबकारी विभाग पर लागू नहीं होती, क्योंकि इस नीति के दायरे से पुलिस, आबकारी, परिवहन, वाणिज्यिक कर और शिक्षा विभाग को बाहर रखा गया है। सरकार की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि किसी कर्मचारी को उसकी पसंद की जगह पर पोस्टिंग प्राप्त करने का कानूनी अधिकार नहीं है।
हाईकोर्ट ने सरकार की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने याचिकाकर्ता की सेवानिवृत्ति की निकटता को ध्यान में रखते हुए गृह जिले में पदस्थापना का आदेश दिया। कोर्ट ने संबंधित अधिकारी को आदेश की प्रति मिलने के 15 दिनों के भीतर आवश्यक कार्रवाई करते हुए पोस्टिंग आदेश जारी करने को कहा है।
इस मामले में अदालत के आदेश का आधार कर्मचारी की सेवानिवृत्ति का अंतिम वर्ष और उनके द्वारा गृह जिले में पदस्थापना की मांग से जुड़े परिस्थितिजन्य पहलू रहे। आदेश के बाद संबंधित विभाग को निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई करनी होगी। हाईकोर्ट के इस फैसले को उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो सेवानिवृत्ति के करीब होने पर गृह जिले में पदस्थापना की मांग करते हैं।