बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर Meta का बड़ा फैसला, भारत में बाल शोषण से जुड़े मामलों की जानकारी एजेंसियों को देगा

भारत सरकार की सख्ती और लगातार बातचीत के बीच Meta ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े मामलों, जिसमें बाल यौन शोषण के मामले भी शामिल हैं, की जानकारी संबंधित भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने पर सहमति जताई है। सरकार इसे ऑनलाइन बाल सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मान रही है। Meta ने भी बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए सरकार के साथ सहयोग की बात कही है।

Sep 15, 2026 - 15:42
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बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर Meta का बड़ा फैसला, भारत में बाल शोषण से जुड़े मामलों की जानकारी एजेंसियों को देगा

UNITED NEWS OF ASIA. भारत में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों के बीच सख्ती बढ़ती जा रही है। इसी बीच Meta ने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों, जिसमें बाल यौन शोषण से संबंधित मामले भी शामिल हैं, की जानकारी भारत की संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने पर सहमति जताई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह फैसला केंद्र सरकार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के बीच लगातार चल रही बातचीत के बाद सामने आया है। सरकार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दे रही है।

Meta की ओर से इस सहयोग की पुष्टि करते हुए कहा गया है कि बच्चों की सुरक्षा कंपनी की प्राथमिकताओं में शामिल है। कंपनी ने भारत सरकार के साथ मिलकर काम करने और ऑनलाइन बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, Meta अब बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों की जानकारी भारतीय साइबर अपराध व्यवस्था तक सीधे पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसे भारत में प्लेटफॉर्म की जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भारत सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों से संबंधित आपत्तिजनक और गैरकानूनी कंटेंट को लेकर लगातार सख्त रुख अपना रही है। जुलाई 2026 में केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया पर बाल यौन शोषण से संबंधित सामग्री के प्रसार की खबरों का संज्ञान लेते हुए संबंधित प्लेटफॉर्म से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। सरकार ने स्पष्ट किया था कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को गैरकानूनी और हानिकारक सामग्री के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने होंगे।

भारत में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए पहले से ही कानूनी व्यवस्था मौजूद है। केंद्र सरकार के अनुसार, POCSO Act, 2012 ऑनलाइन माध्यमों से होने वाले बच्चों के यौन शोषण से संबंधित अपराधों पर भी लागू होता है। इसके अलावा Information Technology Act और IT Rules, 2021 के तहत भी ऑनलाइन आपत्तिजनक और गैरकानूनी सामग्री से निपटने के लिए प्रावधान हैं। फरवरी 2026 में IT Rules में किए गए बदलावों के तहत बच्चों से संबंधित यौन शोषण सामग्री और अन्य हानिकारक सिंथेटिक कंटेंट को लेकर प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारियां और मजबूत की गई हैं।

Meta ने इससे पहले भी अपने प्लेटफॉर्म्स पर बाल शोषण से संबंधित सामग्री के खिलाफ तकनीकी और मॉडरेशन सिस्टम इस्तेमाल करने की जानकारी दी है। कंपनी के अनुसार, वह संदिग्ध अकाउंट्स और कंटेंट की पहचान के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक का इस्तेमाल करती है। Meta ने जुलाई 2026 में बताया था कि उसने वैश्विक स्तर पर बाल शोषण से संबंधित बड़ी संख्या में सामग्री और संदिग्ध अकाउंट्स पर कार्रवाई की है।

सरकार की कोशिश केवल Meta तक सीमित नहीं है। अधिकारियों की अन्य सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के साथ भी बातचीत जारी है, ताकि बच्चों से संबंधित हानिकारक या गैरकानूनी सामग्री की पहचान, रिपोर्टिंग और हटाने की प्रक्रिया को मजबूत किया जा सके। सरकार का जोर इस बात पर है कि प्लेटफॉर्म्स केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई न करें, बल्कि तकनीकी उपायों के जरिए ऐसे कंटेंट की सक्रिय पहचान और रोकथाम की क्षमता भी विकसित करें।

Meta द्वारा भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ बाल सुरक्षा मामलों की जानकारी साझा करने की सहमति को सरकार ने एक महत्वपूर्ण शुरुआती कदम माना है। हालांकि, ऑनलाइन बाल सुरक्षा को प्रभावी बनाने के लिए प्लेटफॉर्म्स की सक्रिय निगरानी, तेज रिपोर्टिंग, कानूनी अनुपालन और जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय लगातार जरूरी रहेगा।