अलीराजपुर में 850 ग्राम के नवजात ने जीती जिंदगी की जंग, 54 दिन बाद 1.430 किलो वजन के साथ डिस्चार्ज

अलीराजपुर जिला अस्पताल के SNCU में 27 सप्ताह की गर्भावस्था में जन्मे 850 ग्राम के नवजात का 54 दिनों तक उपचार किया गया। शिशु को सांस लेने में गंभीर परेशानी और सेप्सिस जैसी जटिलताओं के बीच वेंटिलेटर, CPAP, सर्फेक्टेंट और अन्य उपचार दिया गया। मां की लगातार कंगारू मदर केयर और मेडिकल टीम की निगरानी से बच्चे का वजन बढ़कर 1 किलो 430 ग्राम हुआ, जिसके बाद 31 अगस्त को उसे स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज किया गया।

Sep 15, 2026 - 17:56
 0  2
अलीराजपुर में 850 ग्राम के नवजात ने जीती जिंदगी की जंग, 54 दिन बाद 1.430 किलो वजन के साथ डिस्चार्ज

UNITED NEWS OF ASIA. मुस्तकीम मुगल, आलीराजपुर l जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल केंद्र यानी SNCU से एक राहत और उम्मीद भरी खबर सामने आई है। यहां 27 सप्ताह की गर्भावस्था में महज 850 ग्राम वजन के साथ जन्मे एक नवजात का चिकित्सकीय टीम ने 54 दिनों तक उपचार किया। जन्म के समय बेहद कम वजन और समय से पहले जन्म के कारण बच्चे की स्थिति चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की लगातार निगरानी, आधुनिक उपचार तथा मां की निरंतर देखभाल से नवजात की हालत में धीरे-धीरे सुधार हुआ। उपचार के बाद बच्चे का वजन बढ़कर 1 किलो 430 ग्राम हो गया और उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले नवजातों के लिए SNCU जैसी विशेष इकाइयां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

जानकारी के अनुसार ग्राम राजावाट निवासी मना दीपक कनेश के नवजात बेटे का जन्म 25 जून 2026 को हुआ था। जन्म के समय उसका वजन केवल 850 ग्राम था और वह गर्भावस्था के 27वें सप्ताह में पैदा हुआ था। समय से पहले जन्म के कारण बच्चे के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं थे और उसे सांस लेने में गंभीर कठिनाई का सामना करना पड़ा। नवजात को तत्काल अलीराजपुर जिला अस्पताल के SNCU में भर्ती कराया गया, जहां शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सचिन पाटीदार और उनकी टीम ने उपचार शुरू किया।

बच्चे को RDS यानी रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम की समस्या थी। इसके उपचार के लिए चिकित्सकीय निगरानी में वेंटिलेटर और CPAP की सहायता दी गई। फेफड़ों के विकास में मदद के लिए सर्फेक्टेंट दवा का भी इस्तेमाल किया गया। नवजात में संक्रमण यानी सेप्सिस की समस्या सामने आने पर करीब तीन सप्ताह तक एंटीबायोटिक दवाओं से उपचार किया गया। लगातार निगरानी और उपचार के दौरान चिकित्सकों ने बच्चे की सांस, पोषण और स्वास्थ्य स्थिति पर विशेष ध्यान दिया।

शुरुआती दिनों में नवजात को ट्यूब के माध्यम से दूध दिया गया। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद धीरे-धीरे कटोरी-चम्मच से फीडिंग शुरू की गई। उपचार के साथ मां की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही। मां ने नियमित रूप से कंगारू मदर केयर यानी KMC प्रदान की। इस प्रक्रिया में मां और नवजात के बीच त्वचा से त्वचा का संपर्क कराया जाता है, जिससे कम वजन वाले और समय से पहले जन्मे बच्चों की देखभाल में मदद मिलती है। नवजात देखभाल में परिवार की भागीदारी और KMC को महत्वपूर्ण माना जाता है।

54 दिनों तक चले उपचार और लगातार देखभाल के बाद बच्चे का वजन 850 ग्राम से बढ़कर 1 किलो 430 ग्राम हो गया। स्वास्थ्य में संतोषजनक सुधार के बाद 31 अगस्त 2026 को उसे अलीराजपुर जिला अस्पताल के SNCU से स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज किया गया। बच्चे के अस्पताल से घर जाने के समय माता-पिता ने चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के प्रति आभार जताया।

इस सफल उपचार में डॉ. सचिन पाटीदार, डॉ. शरद मसार, डॉ. दुष्यंत फूंकवाल सहित पूरी SNCU टीम और नर्सिंग स्टाफ की भूमिका रही। 850 ग्राम से 1 किलो 430 ग्राम तक नवजात का सफर जिला अस्पताल में उपलब्ध नवजात देखभाल सुविधाओं, चिकित्सकीय निगरानी और परिवार की सक्रिय भागीदारी का उदाहरण सामने आया है।