विवाद की शुरुआत किरनापुर थाना क्षेत्र के टिमकीटोला गांव निवासी कैलाश चौधरी और उनकी पत्नी से जुड़े मामले से हुई। पुलिस पर आरोप लगाया गया है कि पोस्ट ऑफिस में हुई चोरी के मामले की जांच के दौरान चौधरी दंपती को पूछताछ के लिए थाने लाया गया और उनके साथ कथित तौर पर मारपीट तथा अमानवीय व्यवहार किया गया। मरार माली समाज ने इन आरोपों को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। समाज की ओर से पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन भी सौंपा जा चुका है।
मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से भी कार्रवाई की जा चुकी है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक शिकायत सामने आने के बाद किरनापुर थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। मामले की जांच के लिए महिला एसआईटी का गठन किया गया है। अधिकारियों ने जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई का भरोसा दिया है। पुलिस पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच का विषय है और अंतिम स्थिति एसआईटी की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।
इसी मामले को लेकर मरार माली समाज के लोगों ने किरनापुर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग थाने पहुंचे। बताया गया कि रैली के दौरान अचानक पत्थरबाजी की स्थिति बनी, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया। प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले छोड़े जाने और लाठीचार्ज किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि इस दौरान हुई घटनाओं के विस्तृत कारण और परिस्थितियों को लेकर आधिकारिक स्तर पर पूरी तस्वीर जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
समाज के लोगों का कहना है कि उनका प्रदर्शन चौधरी दंपती को न्याय दिलाने और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर है। समाज प्रतिनिधियों ने पहले भी कहा था कि यदि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं हुई तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने मांग की है कि मामले की जांच ऐसे अधिकारी या एजेंसी से कराई जाए जिसका संबंधित पुलिसकर्मियों से प्रत्यक्ष संबंध न हो, ताकि जांच की निष्पक्षता पर सवाल न उठें।
किरनापुर में हुए इस प्रदर्शन के बाद पुलिस और प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ मामले की निष्पक्ष जांच पूरी कराने की चुनौती है। बालाघाट पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार किरनापुर जिले का एक प्रमुख पुलिस थाना और प्रशासनिक उपखंड है। चौधरी दंपती से जुड़े आरोपों की जांच एसआईटी कर रही है, जबकि समाज की ओर से न्याय की मांग को लेकर विरोध जारी है। अब जांच में सामने आने वाले तथ्यों से यह स्पष्ट होगा कि पुलिस पर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे किन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।