इंजीनियर्स डे पर बालको के इंजीनियरों की भूमिका पर जोर, 1 MTPA एल्यूमिनियम उत्पादन लक्ष्य की दिशा में बढ़ रहा संयंत्र

बालकोनगर में इंजीनियर्स डे के अवसर पर एल्यूमिनियम निर्माण में इंजीनियरों की भूमिका को रेखांकित किया गया। कंपनी 1 मिलियन टन प्रतिवर्ष एल्यूमिनियम उत्पादन क्षमता की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिसमें तकनीक, डेटा, सुरक्षा, गुणवत्ता और टिकाऊ प्रक्रियाओं पर जोर दिया जा रहा है। बालको के 525 किलोएम्पियर स्मेल्टर और डिजिटल तकनीकों के साथ इंजीनियर उत्पादन प्रक्रियाओं को अधिक कुशल और भविष्य के लिए तैयार बनाने में योगदान दे रहे हैं।

Sep 15, 2026 - 18:06
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इंजीनियर्स डे पर बालको के इंजीनियरों की भूमिका पर जोर, 1 MTPA एल्यूमिनियम उत्पादन लक्ष्य की दिशा में बढ़ रहा संयंत्र

UNITED NEWS OF ASIA. राहुल गुप्ता, कोरबा l बालकोनगर में इंजीनियर्स डे के अवसर पर एल्यूमिनियम निर्माण की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में इंजीनियरों की भूमिका को रेखांकित किया गया। बालको के संयंत्र में इंजीनियर सुरक्षा, गुणवत्ता, उत्पादकता, तकनीक और संसाधनों के बेहतर उपयोग से जुड़े क्षेत्रों में लगातार नए समाधान तलाश रहे हैं। कंपनी के अनुसार, एल्यूमिनियम निर्माण केवल धातु को तैयार उत्पाद में बदलने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसमें कई चरणों, तकनीकों और विशेषज्ञताओं का समन्वय शामिल है। ऐसे में प्रक्रिया में किया गया छोटा सुधार भी उत्पादन और गुणवत्ता पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

बालको वर्तमान में 1 मिलियन टन प्रतिवर्ष यानी 1 MTPA एल्यूमिनियम उत्पादन क्षमता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। कंपनी के विस्तार प्रोजेक्ट में 525 किलोएम्पियर तकनीक वाला नया स्मेल्टर महत्वपूर्ण हिस्सा है। वेदांता की जानकारी के अनुसार, बालको ने 2025 में इस 525 किलोएम्पियर स्मेल्टर से पहला मेटल उत्पादन हासिल किया था और विस्तार के बाद कंपनी की कुल क्षमता को 1 MTPA तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

पॉटलाइन संचालन से जुड़ी इंजीनियर प्रियंका साहू ने बताया कि 525 किलोएम्पियर पॉटलाइन जैसी उच्च क्षमता वाली तकनीक के साथ काम करना सीखने और नवाचार के बड़े अवसर देता है। उनके अनुसार, संयंत्र की प्रक्रियाओं में किए गए छोटे-छोटे बदलाव भी उत्पादन की निरंतरता और प्रदर्शन पर महत्वपूर्ण असर डाल सकते हैं। इंजीनियरों का प्रयास लगातार ऐसे सुधारों को आगे बढ़ाना है, जिनसे संचालन अधिक प्रभावी और सुरक्षित बनाया जा सके।

बालको की डिजिटल टीम से जुड़े नवप्रीत सिंह घई ने डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उनके अनुसार, संयंत्र में विभिन्न प्रक्रियाओं के दौरान बड़ी मात्रा में डेटा तैयार होता है। इस डेटा का विश्लेषण कर पैटर्न की पहचान करने, संचालन में होने वाले बदलावों को समझने और समय रहते संभावित चुनौतियों पर कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है। बालको ने भी अपनी डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पहलों के तहत रियल टाइम डेटा और तकनीक आधारित निर्णय प्रक्रिया पर जोर दिया है।

प्रक्रिया एवं गुणवत्ता नियंत्रण टीम से जुड़े अज्लान शरीफ ने कहा कि उत्पादन प्रक्रिया में होने वाले छोटे बदलावों की पहचान और उनके कारणों को समझना गुणवत्ता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। इंजीनियर आंकड़ों का अध्ययन करने के साथ उन्हें जमीनी स्तर पर दिखाई देने वाली परिस्थितियों से जोड़कर देखते हैं। इससे समस्या के मूल कारण तक पहुंचने और प्रक्रिया में जरूरी सुधार करने में मदद मिलती है। बालको ने गुणवत्ता सुधार के लिए ‘Quality Sankalp’ जैसे कार्यक्रम भी संचालित किए हैं, जिनमें प्रक्रिया अनुशासन, दोषों की रोकथाम, रूट कॉज एनालिसिस और डेटा आधारित निर्णय को शामिल किया गया है।

कास्टहाउस से जुड़ी आशिका सिंह ने संसाधनों की दक्षता और टिकाऊ उत्पादन के महत्व को बताया। उनके अनुसार, ऊर्जा की बचत, सामग्री के बेहतर उपयोग और प्रक्रियाओं की दक्षता में सुधार न केवल उत्पादन को बेहतर बनाता है, बल्कि पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में भी योगदान देता है। एल्यूमिनियम की पूरी मूल्य श्रृंखला में इंजीनियर तकनीकी ज्ञान और समस्या समाधान की सोच के जरिए उत्पादन को अधिक प्रभावी बनाने में योगदान दे रहे हैं।

बालको के अनुसार, कंपनी और उसके बिजनेस पार्टनर्स से जुड़े करीब 3,000 इंजीनियर कर्मचारी सुरक्षा, गुणवत्ता, उत्पादकता और टिकाऊ विकास से जुड़े प्रयासों में भूमिका निभा रहे हैं। इंजीनियर्स डे पर इन इंजीनियरों के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा गया कि तकनीकी दक्षता, डिजिटल क्षमताओं और निरंतर सुधार की सोच के जरिए बालको को बड़े पैमाने पर उत्पादन और भविष्य की औद्योगिक जरूरतों के लिए तैयार किया जा रहा है।