सुकमा में भाजपा संगठन पर आदिवासी पदाधिकारियों की उपेक्षा का आरोप, स्वागत कार्यक्रमों से नाम और फोटो गायब

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में भाजपा जिला संगठन पर आदिवासी पदाधिकारियों को जानबूझकर नजरअंदाज करने के गंभीर आरोप लगे हैं। स्वागत कार्यक्रमों के फ्लेक्स से आदिवासी नेताओं के नाम और फोटो हटाए जाने से पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ता दिख रहा है।

Jan 11, 2026 - 11:57
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सुकमा में भाजपा संगठन पर आदिवासी पदाधिकारियों की उपेक्षा का आरोप, स्वागत कार्यक्रमों से नाम और फोटो गायब

UNITED NEWS OF ASIA.रीजेंट गिरी, बीजापुर  सुकमा (छत्तीसगढ़)। भारतीय जनता पार्टी जिला संगठन सुकमा पर आदिवासी समाज के अपमान और उपेक्षा के गंभीर आरोप सामने आए हैं। नव नियुक्त भाजपा पदाधिकारियों के स्वागत को लेकर जिले में आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों में आदिवासी भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को जानबूझकर नजरअंदाज किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। इस रवैये से आदिवासी बहुल सुकमा जिले में पार्टी के भीतर ही असंतोष गहराता नजर आ रहा है।

सूत्रों के अनुसार, छिंदगढ़–तोंगपाल क्षेत्र में आयोजित मोर्चा पदाधिकारियों के स्वागत कार्यक्रम में भाजपा युवा मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष भीमा मरकाम और आदिवासी मोर्चा जिलाध्यक्ष अनु मंडावी जैसे प्रमुख आदिवासी पदाधिकारियों का नाम तक स्वागत फ्लेक्स में शामिल नहीं किया गया। यह बात सामने आने के बाद आदिवासी भाजपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई है। कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल एक चूक नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया नजरअंदाज है।

इसी तरह कोंटा में आयोजित होने वाले स्वागत कार्यक्रम में भी यही स्थिति देखने को मिली। कार्यक्रम के लिए लगाए गए फ्लेक्स में भाजपा प्रदेश युवा मोर्चा उपाध्यक्ष भीमा मरकाम और आदिवासी मोर्चा जिलाध्यक्ष अनु मंडावी का फोटो तक नहीं लगाया गया, जबकि अन्य नेताओं को प्रमुखता से स्थान दिया गया। इससे आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों के सम्मान पर सवाल खड़े हो गए हैं।

आदिवासी बहुल सुकमा जिले में इस तरह का व्यवहार राजनीतिक दृष्टि से भी गंभीर माना जा रहा है। भाजपा अक्सर आदिवासी समाज को अपने संगठन की रीढ़ बताती रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर उनके प्रतिनिधियों को मंच और प्रचार सामग्री से दूर रखना पार्टी की कथनी और करनी के बीच अंतर को उजागर करता है।

आदिवासी समाज और भाजपा से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते इस मुद्दे पर पार्टी नेतृत्व ने ध्यान नहीं दिया, तो इसका नकारात्मक असर संगठन और आगामी राजनीतिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि जिला संगठन इस मामले पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करे और भविष्य में ऐसी उपेक्षा न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाए।

अब यह देखना अहम होगा कि भाजपा जिला संगठन सुकमा इन आरोपों पर क्या सफाई देता है और क्या आदिवासी समाज की नाराजगी को दूर करने के लिए कोई ठोस पहल की जाती है, या यह मामला और तूल पकड़ता है।