दीपावली पर अध्यात्म पथ सेवा परिवार ने बुजुर्गों के बीच बांटी खुशियां, पुलगांव वृद्धाश्रम में किया सेवा कार्य

दुर्ग में अध्यात्म पथ सेवा परिवार ने ‘सेवा का दीप जलाएं’ अभियान के तहत पुलगांव वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ दीपावली मनाई। इस दौरान जूस, मूंग बड़ा और मिठाइयां वितरित की गईं। परिवार के सदस्यों ने बुजुर्गों के साथ समय बिताकर त्योहार की खुशियां साझा कीं। अभियान का उद्देश्य जरूरतमंदों, बुजुर्गों और वंचित लोगों के जीवन में अपनत्व और खुशियों का उजाला पहुंचाना है।

Nov 5, 2026 - 19:14
 0  2
दीपावली पर अध्यात्म पथ सेवा परिवार ने बुजुर्गों के बीच बांटी खुशियां, पुलगांव वृद्धाश्रम में किया सेवा कार्य

UNITED NEWS OF ASIA. दुर्ग। दीपावली का पर्व केवल घरों में दीप जलाने और रोशनी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दूसरों के जीवन में खुशियों का उजाला भरने का भी अवसर है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए अध्यात्म पथ सेवा परिवार ने इस दीपावली पर ‘सेवा का दीप जलाएं’ अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के माध्यम से जरूरतमंदों, बुजुर्गों और वंचित लोगों के जीवन में खुशियों की रोशनी पहुंचाने का संकल्प लिया गया है। अभियान के तहत परिवार के सदस्यों ने पुलगांव वृद्धाश्रम पहुंचकर वहां निवासरत बुजुर्गों के साथ दीपावली की खुशियां साझा कीं।

पुलगांव वृद्धाश्रम में बुजुर्गों को बांटी मिठाइयां

अध्यात्म पथ सेवा परिवार के इस अभियान के प्रथम चरण में आस्था वृद्धाश्रम में पंखों का वितरण किया गया था। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए सदस्य पुलगांव वृद्धाश्रम पहुंचे और बुजुर्गों को जूस, मूंग बड़ा एवं मिठाइयां वितरित कीं। इस दौरान सदस्यों ने बुजुर्गों के साथ आत्मीयता से समय बिताया और उन्हें दीपावली की शुभकामनाएं दीं। इस पहल का उद्देश्य त्योहार की खुशियों में उन लोगों को भी शामिल करना है, जिन्हें अपनापन, साथ और स्नेह की विशेष आवश्यकता होती है।

सेवा के साथ अपनत्व और सम्मान भी जरूरी

कार्यक्रम में अध्यात्म पथ सेवा परिवार की अध्यक्ष हेमा सक्सेना ने कहा कि दीपावली का वास्तविक आनंद तभी है, जब हमारी खुशियों में समाज के उन लोगों की भी भागीदारी हो, जिन्हें अपनों के साथ और आत्मीयता की सबसे अधिक आवश्यकता है। वृद्धजनों के चेहरों पर मुस्कान लाना और उनके साथ कुछ पल बिताना उनके लिए सौभाग्य की बात है।

महासचिव नमित क्षत्रिय ने कहा कि सेवा केवल किसी को वस्तु या सुविधा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी के जीवन में अपनत्व, सम्मान और प्रसन्नता का अनुभव कराना भी सेवा है। कोषाध्यक्ष हर्षा ताम्रकार ने कहा कि त्योहारों की खुशियां तभी सार्थक होती हैं, जब उन्हें समाज के जरूरतमंद लोगों के साथ बांटा जाए। सेवा के छोटे-छोटे प्रयास भी किसी के चेहरे पर बड़ी मुस्कान ला सकते हैं। वरिष्ठ सदस्य सुशीला सिन्हा ने कहा कि बुजुर्ग समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उन्हें धन और सुविधाओं से अधिक प्रेम, सम्मान और आत्मीयता की आवश्यकता होती है।

बिना चंदा मांगे लोगों को सेवा से जोड़ने की पहल

कार्यक्रम के प्रेरक, संरक्षक एवं संयोजक आचार्य डॉ. अजय आर्य ने कहा कि सेवा को जीवन का आधार बनाना चाहिए, क्योंकि सेवा से मिलने वाली खुशी अप्रतिम होती है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने समय, सामर्थ्य और संसाधनों का थोड़ा-सा हिस्सा भी दूसरों के हित में लगाए, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अध्यात्म पथ सेवा परिवार की शुरुआत इसी सोच के साथ की गई है।

उन्होंने बताया कि इस परिवार की विशेषता है कि यहां सेवा कार्यों के लिए किसी से चंदा या आर्थिक सहयोग नहीं मांगा जाता। मित्रों और परिचितों को प्रेरित कर सेवा गतिविधियों से जोड़ा जाता है। लोग अपनी इच्छा और सामर्थ्य के अनुसार आगे आते हैं और एक सेवा कार्य में सहभागी बनने के बाद स्वयं अगली सेवा का संकल्प लेते हैं। बिना किसी दबाव के प्रेरणा और आत्मीयता से सेवा की इस श्रृंखला को आगे बढ़ाना ही परिवार की विशेषता है।

हर जरूरतमंद तक पहुंचे खुशियों का उजाला

आचार्य डॉ. अजय आर्य ने कहा कि प्रयास यह होना चाहिए कि दीपावली का प्रकाश केवल घरों और बाजारों तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के हर उस व्यक्ति तक पहुंचे, जिसके जीवन में स्नेह, सहयोग और खुशियों के दीप जलाने की आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से अपने आसपास जरूरतमंदों की सहायता करने और किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने का माध्यम बनने की अपील की।

अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री भी अध्यात्म पथ सेवा परिवार के इस अभियान में संरक्षक की भूमिका निभा रहे हैं। परिवार का संदेश है कि त्योहार केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में खुशियां बांटने के लिए भी मनाएं। सेवा का एक छोटा-सा दीप किसी के जीवन में उम्मीदों का उजाला कर सकता है।