पीएम मोदी के Gen-Z अंदाज वाले पोस्ट पर सौरव दास का तंज, बोले- गंभीर पदों पर बैठे लोगों जैसी भाषा लिखें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग योजना से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट पर CJP प्रवक्ता सौरव दास ने तंज कसा है। पीएम मोदी ने युवाओं के बीच लोकप्रिय Gen-Z शैली में पोस्ट करते हुए लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण में आत्मनिर्भरता की जरूरत बताई थी। सौरव दास ने पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री को गंभीर पदों पर बैठे लोगों की तरह औपचारिक भाषा इस्तेमाल करने की नसीहत दी। इस बीच केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण खनिजों के घरेलू प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए दो हजार आठ सौ चौदह करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है।

Nov 5, 2026 - 16:15
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पीएम मोदी के Gen-Z अंदाज वाले पोस्ट पर सौरव दास का तंज, बोले- गंभीर पदों पर बैठे लोगों जैसी भाषा लिखें

UNITED NEWS OF ASIA. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर राजनीतिक और सोशल मीडिया जगत में चर्चा शुरू हो गई है। इस बार चर्चा की वजह प्रधानमंत्री का Gen-Z यानी युवा पीढ़ी के बीच लोकप्रिय अनौपचारिक अंदाज है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश में क्रिटिकल मिनरल के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की नई योजना की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की थी। हालांकि, पोस्ट की भाषा और शैली CJP प्रवक्ता सौरव दास को पसंद नहीं आई। उन्होंने प्रधानमंत्री की पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए तंज कसा और उन्हें गंभीर पदों पर बैठे लोगों की तरह सामान्य एवं औपचारिक भाषा में लिखने की नसीहत दी।

सौरव दास ने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा कि प्रधानमंत्री को ऐसे ट्वीट करने चाहिए, जैसे गंभीर पदों पर बैठे सामान्य लोग लिखते हैं। उन्होंने कहा कि यह जरूरत से ज्यादा Gen-Z बनने की कोशिश जैसा लगता है और असहज करने वाला है। दास ने आगे टिप्पणी करते हुए कहा कि नीतियां गंभीर हों या नहीं, कम से कम गंभीर लेखन को नहीं छोड़ना चाहिए। उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद प्रधानमंत्री की पोस्ट की भाषा को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई है।

क्रिटिकल मिनरल पर पीएम मोदी ने साझा की थी जानकारी

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार नवंबर 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग योजना को मंजूरी दिए जाने की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की थी। अपने पोस्ट में उन्होंने युवाओं के बीच प्रचलित छोटे वाक्यों और अनौपचारिक भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारत को भविष्य की तकनीकों को ताकत देने वाले महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना चाहिए? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि वह ऐसा बिल्कुल नहीं चाहते।

प्रधानमंत्री ने लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे खनिजों का उल्लेख करते हुए बताया कि ये इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। भारत में इन खनिजों के प्रसंस्करण और उच्च शुद्धता वाले उत्पादों के निर्माण की घरेलू क्षमता अभी सीमित है। ऐसे में आयात पर निर्भरता कम करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

दो हजार आठ सौ चौदह करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी

केंद्र सरकार ने क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए दो हजार आठ सौ चौदह करोड़ रुपये की पूंजीगत सहायता योजना को मंजूरी दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए लागू होगी। इसके तहत देश में चार प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें लिथियम के दो और निकेल के दो संयंत्र शामिल होंगे।

योजना के अंतर्गत पात्र निवेश पर तीस प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी दी जाएगी। प्रत्येक लिथियम संयंत्र की न्यूनतम प्रसंस्करण क्षमता तीस हजार टन और प्रत्येक निकेल संयंत्र की न्यूनतम क्षमता पचास हजार टन निर्धारित की गई है। निकेल के प्रसंस्करण के दौरान सह-उत्पाद के रूप में कोबाल्ट प्राप्त होने की भी उम्मीद है।

EV, बैटरी और रक्षा क्षेत्र को मिलेगा लाभ

सरकार का उद्देश्य भारत में महत्वपूर्ण खनिजों की प्रोसेसिंग क्षमता विकसित करना और विदेशी आयात पर निर्भरता कम करना है। वर्तमान में इन खनिजों के प्रसंस्करण का बड़ा हिस्सा दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों में केंद्रित है। इससे अंतरराष्ट्रीय तनाव, कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति में बाधा आने पर भारत की औद्योगिक जरूरतें प्रभावित हो सकती हैं।

घरेलू स्तर पर प्रसंस्करण संयंत्र विकसित होने से इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और विशेष इस्पात जैसे क्षेत्रों को लाभ मिलने की संभावना है। सरकार इसे महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने और देश में मूल्य संवर्धन बढ़ाने की दिशा में अहम कदम मान रही है।

एक ओर प्रधानमंत्री मोदी की पोस्ट की भाषा को लेकर सौरव दास की टिप्पणी चर्चा में है, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार की नई योजना को महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में घरेलू क्षमता विकसित करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।