बिना अनुमति पेड़ कटाई का आरोप, चांदामेटा में वन विभाग और WCL कर्मचारियों पर उठे सवाल

परासिया के चांदामेटा क्षेत्र में बिना अनुमति पेड़ों की कटाई किए जाने का आरोप सामने आया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि WCL के कर्मचारियों की मौजूदगी में बंगले परिसर के नीलगिरी के पेड़ों को काटा जा रहा है, जबकि वन विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। मामले में कर्मचारियों पर पत्रकार से अभद्र व्यवहार और धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।

Jul 17, 2026 - 10:56
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बिना अनुमति पेड़ कटाई का आरोप, चांदामेटा में वन विभाग और WCL कर्मचारियों पर उठे सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. यज्ञ राज पटेल, छिंदवाड़ा l मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया क्षेत्र अंतर्गत चांदामेटा में बिना अनुमति पेड़ों की कटाई किए जाने के आरोपों ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाया गया है कि वार्ड क्रमांक 7 स्थित थाना परिसर के सामने बने WCL (वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) के आवासीय परिसर में नीलगिरी के पेड़ों की बड़े पैमाने पर कटाई की जा रही है, जबकि संबंधित विभाग की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार एक ओर करोड़ों रुपये खर्च कर वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर बिना अनुमति पेड़ों की कटाई की घटनाएं सामने आ रही हैं। आरोप है कि इस मामले में वन विभाग की ओर से कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, WCL द्वारा निर्मित बंगले परिसर में लगे नीलगिरी के पेड़ों को कथित रूप से छंटाई के नाम पर काटा जा रहा था। आरोप है कि इस कार्य में WCL के दो कर्मचारी मजदूरों के माध्यम से पेड़ों की कटाई करा रहे थे। स्थानीय लोगों का दावा है कि कर्मचारियों का पहनावा यह संकेत दे रहा था कि वे ड्यूटी के दौरान ही इस कार्य में लगे हुए थे।

घटना के दौरान जब इस संबंध में अनुमति और वैधानिक प्रक्रिया की जानकारी लेने का प्रयास किया गया, तो संबंधित कर्मचारियों पर अभद्र व्यवहार करने और धमकी देने का आरोप लगाया गया है। आरोपों के मुताबिक कर्मचारियों ने कहा कि जहां शिकायत करनी है कर दो, उन्हें किसी कार्रवाई का भय नहीं है।

मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि यदि सरकारी या सार्वजनिक परिसरों में भी बिना अनुमति पेड़ों की कटाई होती है और संबंधित विभाग कार्रवाई नहीं करता, तो पर्यावरण संरक्षण के सरकारी अभियान की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।

हालांकि, इस पूरे मामले में वन विभाग या WCL की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि पेड़ों की कटाई के लिए सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं।

यदि बिना अनुमति पेड़ों की कटाई की गई है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि यह नियमित छंटाई का कार्य था, तो इसकी भी आधिकारिक जानकारी सामने आना आवश्यक है। फिलहाल स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की मांग की है। मामले में प्रशासन और संबंधित विभाग की आधिकारिक जांच एवं प्रतिक्रिया का इंतजार है।