एन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर टाटा संस का जवाब, नोएल टाटा की आपत्तियों को किया खारिज

टाटा संस ने चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की पांच साल की पुनर्नियुक्ति को वैध बताते हुए टाटा ट्रस्ट्स प्रमुख नोएल टाटा की आपत्तियों को खारिज कर दिया है। कंपनी ने कहा कि 17 सितंबर की बोर्ड बैठक में फैसला लागू कानून और Articles of Association के अनुरूप बहुमत से लिया गया था। विवाद मुख्य रूप से चेयरमैन की पुनर्नियुक्ति के लिए कंपनी के आंतरिक नियमों की व्याख्या और बोर्ड के कास्टिंग वोट को लेकर है।

Sep 25, 2026 - 11:41
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एन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर टाटा संस का जवाब, नोएल टाटा की आपत्तियों को किया खारिज

UNITED NEWS OF ASIA. टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को लेकर टाटा समूह में चल रहा विवाद अब और स्पष्ट रूप से सामने आ गया है। टाटा संस ने 24 सितंबर 2026 को टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा को भेजे जवाब में चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को वैध बताया और उनकी ओर से उठाई गई आपत्तियों को खारिज कर दिया। कंपनी के अनुसार 17 सितंबर को बोर्ड ने लागू कानून और कंपनी के Articles of Association के तहत बहुमत से चंद्रशेखरन को उनके मौजूदा कार्यकाल के बाद अगले पांच साल के लिए फिर नियुक्त करने का प्रस्ताव मंजूर किया था।

विवाद की शुरुआत 17 सितंबर की बोर्ड बैठक के बाद हुई, जब टाटा संस के बोर्ड ने चंद्रशेखरन को एक और पांच साल का कार्यकाल देने का फैसला किया। नोएल टाटा ने इस फैसले पर आपत्ति जताई थी। इससे पहले चंद्रशेखरन ने अगस्त में मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा कार्यकाल नहीं लेने की बात कही थी, लेकिन बाद में बोर्ड ने उनकी पुनर्नियुक्ति को मंजूरी दी। उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होना है।

टाटा संस के जवाब में मुख्य विवाद Articles of Association के Article 118 और Article 121 की व्याख्या को लेकर है। नोएल टाटा की आपत्ति थी कि चेयरमैन की पुनर्नियुक्ति में भी वह विशेष प्रक्रिया लागू होनी चाहिए, जो टाटा ट्रस्ट्स की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी की स्थिति में चेयरमैन के चयन से संबंधित है। वहीं टाटा संस का कहना है कि Article 118 में दी गई विशेष प्रक्रिया नए चेयरमैन की नियुक्ति के लिए है और मौजूदा चेयरमैन की पुनर्नियुक्ति पर इसे उसी तरह लागू नहीं किया जा सकता।

कंपनी ने अपने रुख के समर्थन में तीन कानूनी राय का भी हवाला दिया है। Business Standard के अनुसार, टाटा संस ने टाटा ट्रस्ट्स को अपनी स्थिति समझाने के लिए इन कानूनी राय को उपलब्ध कराया। इनमें यह राय सामने रखी गई कि Article 118 चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर लागू नहीं होता और 17 सितंबर का प्रस्ताव कंपनी के Articles के अनुसार पारित हुआ।

बोर्ड में मतदान भी इस विवाद का अहम हिस्सा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 17 सितंबर की बैठक में ट्रस्ट के नामित निदेशकों नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन के रुख अलग-अलग रहे। नोएल टाटा ने प्रस्ताव का विरोध किया, जबकि वेणु श्रीनिवासन ने समर्थन किया। इसके बाद बोर्ड ने बहुमत के आधार पर प्रस्ताव को मंजूरी दी और बैठक की अध्यक्षता कर रहे हरीश मनवानी के कास्टिंग वोट का भी इस्तेमाल हुआ। टाटा संस का तर्क है कि Articles के तहत यह प्रक्रिया वैध थी, जबकि टाटा ट्रस्ट्स ने इस व्याख्या पर सवाल उठाए हैं।

टाटा ट्रस्ट्स की ओर से पहले यह कहा गया था कि 17 सितंबर का प्रस्ताव कानूनी प्रभाव नहीं रखता, क्योंकि उनके अनुसार ट्रस्ट के नामित निदेशकों की आवश्यक सहमति नहीं मिली। इस तरह दोनों पक्षों के बीच मुख्य मतभेद कंपनी के Articles की व्याख्या और ट्रस्ट के नामित निदेशकों के अधिकारों को लेकर है।

इस विवाद का एक दूसरा महत्वपूर्ण पहलू टाटा संस की संभावित लिस्टिंग और भारतीय रिजर्व बैंक से जुड़ा नियामकीय मामला भी है। रिपोर्टों के अनुसार RBI ने टाटा संस की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में पंजीकरण से बाहर निकलने की अर्जी को खारिज किया है। इसके बाद कंपनी के लिए नियामकीय आवश्यकताओं के अनुरूप आगे की रणनीति पर चर्चा महत्वपूर्ण हो गई है। टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर भी ट्रस्ट्स और कंपनी के रुख में अंतर की रिपोर्ट सामने आई है।

फिलहाल एन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच कानूनी और प्रशासनिक मतभेद जारी हैं। टाटा संस ने अपने 24 सितंबर के जवाब में बोर्ड के फैसले को वैध बताया है, जबकि टाटा ट्रस्ट्स की ओर से इस फैसले की वैधता पर पहले ही आपत्ति दर्ज की जा चुकी है। आगे इस मामले में टाटा ट्रस्ट्स की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।