अनंत चतुर्दशी पर निकलने वाला यह चल समारोह इंदौर की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी महत्वपूर्ण परंपराओं में शामिल है। हर वर्ष बड़ी संख्या में शहरवासी झांकियों और अखाड़ों के प्रदर्शन को देखने के लिए अलग-अलग मार्गों पर पहुंचते हैं। इस बार भी आयोजन को लेकर लोगों में उत्साह है। प्रशासन ने भीड़ और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए हैं। दोपहर 3 बजे से शहर में डायवर्टेड ट्रैफिक प्लान लागू किया जाएगा, ताकि चल समारोह के दौरान यातायात को व्यवस्थित रखा जा सके।
परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी झांकियां निर्धारित क्रम में निकलेंगी। सबसे आगे खजराना गणेश मंदिर की झांकी रहेगी। इसके बाद शास्त्री कॉर्नर, इंदौर विकास प्राधिकरण, नगर निगम और शहर की विभिन्न मिलों की झांकियां शामिल होंगी। मिल परिसरों में दिन-रात काम कर कलाकारों और कर्मचारियों ने झांकियों को अंतिम रूप दिया है। इनमें धार्मिक प्रसंगों के साथ सामाजिक संदेश और समसामयिक विषयों को भी रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
चल समारोह के दौरान निकलने वाली झांकियों और अखाड़ों के मूल्यांकन के लिए प्रशासन ने अलग-अलग निर्णायक समितियों का गठन किया है। कलेक्टर शिवम वर्मा के आदेश के तहत गठित झांकी निर्णायक समिति में पांच सदस्यों को जिम्मेदारी दी गई है। इसमें प्रेस क्लब अध्यक्ष दीपक कर्दम, महासचिव प्रदीप जोशी, परियोजना अधिकारी राजेंद्र मंडलोई, PWD कार्यपालन यंत्री चेतना चौहान और ITI प्रशिक्षण अधिकारी विपिन पुरोहित शामिल हैं।
अखाड़ों के प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए 12 सदस्यीय समिति बनाई गई है। इसमें रविंद्रसिंह गौड़, बुद्धासिंह पहलवान, रमेश यादव, सुरेश राणे पहलवान, मानसिंह यादव, विनोद गांधी, गोपाल बैरासी, दिनेश शुक्ला ‘गुरु’, राजा, मीत भवानी कश्यप, गोपाल यादव और गोविंद गुर्जर को शामिल किया गया है। दोनों समितियों के संयोजक उप संचालक जनसंपर्क पुष्पेंद्र वास्कले बनाए गए हैं।
निर्णायक समितियां निर्धारित मापदंडों के आधार पर झांकियों और अखाड़ों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करेंगी। झांकियों में सजावट, प्रस्तुति, विषयवस्तु और रचनात्मकता जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा, जबकि अखाड़ों के प्रदर्शन का भी तय मानकों के अनुसार आकलन किया जाएगा। इससे उत्कृष्ट प्रस्तुति देने वाली झांकियों और अखाड़ों को चयनित करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
प्रशासन की ओर से चल समारोह को व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए यातायात तथा अन्य व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया गया है। शाम को झांकियों के मार्ग पर लोगों की भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए डायवर्जन व्यवस्था लागू रहेगी। शहरवासियों से भी प्रशासन की व्यवस्था में सहयोग करने की अपील की गई है।
इंदौर की झांकी परंपरा धार्मिक आस्था के साथ शहर की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता को भी सामने लाती है। 103 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में हर साल नए विषयों और प्रस्तुतियों को शामिल किया जाता है। इस बार 22 झांकियों के कारवां के साथ एक बार फिर इंदौर की यह ऐतिहासिक परंपरा शहर के लोगों और बाहर से आने वाले दर्शकों के सामने दिखाई देगी।