नीट पेपर लीक के विरोध में कठ्ठीवाड़ा में युवाओं का प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
आलीराजपुर जिले के कठ्ठीवाड़ा में आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेश पटेल के नेतृत्व में युवाओं और छात्र-छात्राओं ने कथित नीट पेपर लीक, परीक्षा अनियमितताओं और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति के नाम तहसील प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों को न्याय दिलाने की मांग की गई।
UNITED NEWS OF ASIA. मुस्तकीम मुगल, आलीराजपुर l मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले के कठ्ठीवाड़ा ब्लॉक में शुक्रवार को कथित नीट (NEET) पेपर लीक, परीक्षा अनियमितताओं तथा छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेश पटेल के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवाओं, छात्र-छात्राओं तथा स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति के नाम तहसील प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराने, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने तथा परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने की मांग की गई।
प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने विभिन्न नारों के माध्यम से अपनी नाराजगी व्यक्त की। "नीट घोटाला बंद करो", "हम अपना अधिकार मांगते हैं", "धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो" और "छात्रों के साथ न्याय करो" जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगने से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होता है और युवाओं का परीक्षा प्रणाली पर विश्वास कमजोर पड़ता है।
सभा को संबोधित करते हुए महेश पटेल ने कहा कि देशभर में छात्र पिछले कई दिनों से न्याय की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन पर पुलिस कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि नीट परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों ने लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को संकट में डाल दिया है। उनका कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और यदि इसमें किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता होती है तो उसका सीधा असर मेहनत करने वाले विद्यार्थियों पर पड़ता है।
महेश पटेल ने कहा कि गरीब, आदिवासी, दलित एवं पिछड़े वर्ग के परिवार अपने बच्चों की शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए वर्षों तक मेहनत करते हैं तथा बड़ी आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हैं। ऐसे परिवार अपने बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से हर संभव प्रयास करते हैं। यदि परीक्षा प्रक्रिया में कथित पेपर लीक या अन्य अनियमितताएं सामने आती हैं तो सबसे अधिक नुकसान इन्हीं विद्यार्थियों और उनके परिवारों को उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं युवाओं का मनोबल तोड़ती हैं और उनके भविष्य पर गंभीर प्रभाव डालती हैं।
ज्ञापन में राष्ट्रपति से मांग की गई कि नीट परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए। साथ ही इस पूरे प्रकरण में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाया जाए, जिससे विद्यार्थियों का भरोसा कायम रह सके और योग्य अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके।
ज्ञापन में छात्रों के साथ हुए कथित अन्याय को समाप्त करने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि परीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं होगी तो प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के साथ न्याय नहीं हो सकेगा। उन्होंने सरकार से ऐसी व्यवस्था विकसित करने की मांग की जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना समाप्त हो और प्रत्येक अभ्यर्थी को समान अवसर प्राप्त हो।
प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग भी उठाई गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि परीक्षा प्रणाली से जुड़े विवादों के बीच जवाबदेही तय होना आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के साथ जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए।
महेश पटेल ने कहा कि यदि छात्रों को न्याय नहीं मिला और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक क्षेत्र का मुद्दा नहीं है, बल्कि देशभर के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा विषय है। इसलिए यह अभियान जिले से लेकर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से छात्रों की आवाज उठाई जाएगी और जब तक उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थी कई वर्षों तक कठिन परिश्रम करते हैं। अनेक परिवार आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपने बच्चों की पढ़ाई पर बड़ी राशि खर्च करते हैं। ऐसे में यदि परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं तो छात्रों का मानसिक, शैक्षणिक और आर्थिक नुकसान होता है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की मांग की।
कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन तहसील प्रशासन को सौंपा गया। ज्ञापन में कथित पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, छात्रों के साथ न्याय सुनिश्चित करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू करने की मांग की गई। प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, युवा और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।