600 वर्ष पुराने ऐतिहासिक गोंचा महापर्व में भक्ति का अद्भुत रंग, पद्मश्री अनुज शर्मा के भजनों से सराबोर हुआ जगदलपुर

जगदलपुर के ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर में आयोजित 600 वर्ष पुराने गोंचा महापर्व के अवसर पर भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं क्षेत्रीय विधायक किरण सिंह देव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। पद्मश्री अनुज शर्मा ने अपनी भक्तिमय प्रस्तुतियों से हजारों श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। आयोजन के दौरान भगवान जगन्नाथ की विशेष आरती, दीप प्रज्ज्वलन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और कलाकार सम्मान समारोह आयोजित किया गया। वक्ताओं ने गोंचा महापर्व को बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का प्रतीक बताया।

Jul 24, 2026 - 18:28
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600 वर्ष पुराने ऐतिहासिक गोंचा महापर्व में भक्ति का अद्भुत रंग, पद्मश्री अनुज शर्मा के भजनों से सराबोर हुआ जगदलपुर

UNITED NEWS OF ASIA. जगदलपुर के ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर में आयोजित 600 वर्षों से अधिक प्राचीन गोंचा महापर्व के अवसर पर इस वर्ष भी भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। सदियों पुरानी इस परंपरा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आज भी जनमानस की आस्था और सामाजिक एकता का मजबूत आधार है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और सांस्कृतिक प्रेमियों की उपस्थिति ने पूरे आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।

इस गरिमामय आयोजन में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं क्षेत्रीय विधायक किरण सिंह देव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ 360 घर अरण्य ब्राह्मण समाज (बस्तर संभाग) के पदाधिकारी, आयोजन समिति के सदस्य तथा अनेक जनप्रतिनिधि मंच पर उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान धार्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और सामाजिक सहभागिता का अद्भुत संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्री जगन्नाथ की विशेष आरती और दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में धार्मिक वातावरण के बीच भक्ति और उत्साह का विशेष माहौल बना रहा। आरती के पश्चात आयोजित भव्य भजन संध्या ने पूरे कार्यक्रम को नई ऊंचाई प्रदान की।

सांस्कृतिक संध्या के मुख्य आकर्षण रहे पद्मश्री अनुज शर्मा ने अपनी सुमधुर आवाज में एक से बढ़कर एक भक्तिमय प्रस्तुतियां दीं। उनके भजनों ने उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। जैसे-जैसे भजनों की श्रृंखला आगे बढ़ती गई, पूरा परिसर भगवान जगन्नाथ के जयकारों और तालियों की गूंज से भर उठा। श्रद्धालु देर रात तक भक्ति संगीत में डूबे रहे और कई लोग भजनों पर झूमते हुए अपनी आस्था व्यक्त करते नजर आए। अनुज शर्मा की प्रस्तुति ने इस ऐतिहासिक आयोजन को और भी यादगार बना दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए किरण सिंह देव ने कहा कि गोंचा महापर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और सामूहिक एकता का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी लोगों को जोड़ने का कार्य कर रही है। नई पीढ़ी जिस उत्साह और श्रद्धा के साथ इस महापर्व से जुड़ रही है, वह इस विरासत के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। उन्होंने कहा कि संस्कृति और परंपरा किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत होती है और गोंचा महापर्व इसी ताकत का उत्कृष्ट उदाहरण है।

उन्होंने पद्मश्री अनुज शर्मा की प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि उनके भजनों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके अनुसार इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं।

अपने संबोधन में अनुज शर्मा ने कहा कि बस्तर की धरती कला, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से समृद्ध है। गोंचा महापर्व केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि 600 वर्षों से अधिक पुरानी जीवंत सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ के चरणों में भजन प्रस्तुत करना उनके लिए सौभाग्य और आध्यात्मिक संतोष का विषय है। उन्होंने बस्तरवासियों के स्नेह, प्रेम और सम्मान के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यहां की जनता की श्रद्धा और संस्कृति पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।

अनुज शर्मा ने यह भी कहा कि कलाकार के लिए सबसे बड़ा सम्मान श्रोताओं का प्रेम होता है और जगदलपुर में उन्हें जो अपनापन मिला, वह जीवनभर याद रहेगा। उन्होंने आयोजन समिति और सभी श्रद्धालुओं का धन्यवाद करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की।

आयोजन समिति के प्रतिनिधियों ने बताया कि गोंचा महापर्व बस्तर की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं में से एक है। यह महापर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक संरक्षण और सामुदायिक एकजुटता का भी प्रतीक है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होकर भगवान जगन्नाथ के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।

समिति ने कहा कि इस वर्ष की सांस्कृतिक संध्या ने महापर्व की गरिमा को और अधिक बढ़ाया है। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को नई पहचान दी। आयोजन के दौरान सुरक्षा, यातायात, श्रद्धालुओं की सुविधा और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।

समारोह के समापन अवसर पर आयोजन समिति, 360 घर अरण्य ब्राह्मण समाज के पदाधिकारियों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने अनुज शर्मा का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया। इस दौरान उनके उत्कृष्ट सांस्कृतिक योगदान और भक्ति संगीत के माध्यम से छत्तीसगढ़ की संस्कृति को नई पहचान देने के प्रयासों की सराहना की गई। आयोजन समिति ने सभी अतिथियों, कलाकारों, स्वयंसेवकों और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

देर रात तक चले इस भव्य आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पूरा श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर भक्ति, संगीत और सांस्कृतिक उल्लास से सराबोर दिखाई दिया। गोंचा महापर्व के इस ऐतिहासिक आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत आज भी उतनी ही जीवंत और समृद्ध है, जितनी सदियों पहले थी। श्रद्धालुओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी, अनुशासित आयोजन और भक्तिमय वातावरण ने इस सांस्कृतिक संध्या को अविस्मरणीय बना दिया। गोंचा महापर्व की यह भव्य प्रस्तुति आने वाले वर्षों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर याद रखी जाएगी।