SIR विवाद के बीच ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, फैसले रद्द करने और कार्रवाई की मांग

विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में कथित तौर पर अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए फैसलों को निरस्त करने, फॉर्म 6 में किए गए बदलावों को रद्द करने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

Sep 25, 2026 - 14:26
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SIR विवाद के बीच ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, फैसले रद्द करने और कार्रवाई की मांग

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। यह याचिका अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर की गई है। इसमें कथित तौर पर लिए गए कुछ फैसलों को निरस्त करने के साथ संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। मामले की जानकारी सामने आने के बाद SIR प्रक्रिया को लेकर चल रही कानूनी और राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

याचिका में दावा किया गया है कि चुनाव आयोग में SIR से संबंधित कुछ फैसले अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। याचिकाकर्ता ने ऐसे निर्णयों, दिशा-निर्देशों और कथित सॉफ्टवेयर बदलावों को चुनौती दी है। याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि यदि किसी अधिकारी को अपने आधिकारिक कर्तव्यों के जानबूझकर उल्लंघन का दोषी पाया जाता है तो जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत कार्रवाई की जाए। हालांकि, ये सभी आरोप याचिका में लगाए गए दावे हैं और इन पर न्यायालय का अंतिम निर्णय अभी नहीं आया है।

याचिका में Form 6 में कथित बदलाव को भी प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। Form 6 मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाला वैधानिक फॉर्म है। याचिकाकर्ता ने कथित संशोधनों को रद्द कर मूल Form 6 को बहाल करने की मांग की है। इसके अलावा चुनावी डेटा से जुड़े ECINet और ERONet सिस्टम के संबंध में भी जांच की मांग की गई है। याचिका में संबंधित सर्वर लॉग, डेटाबेस, संचार रिकॉर्ड और मेटाडाटा को सुरक्षित रखने का अनुरोध भी किया गया है।

याचिका में SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का भी दावा किया गया है। इसके लिए एक स्वतंत्र न्यायिक जांच आयोग या विशेष जांच दल गठित करने की मांग रखी गई है। प्रस्तावित जांच में सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता और साइबर सुरक्षा तथा आईटी विशेषज्ञों की सहायता का अनुरोध किया गया है। याचिका में मतदाता सूची से कथित तौर पर हटाए गए नामों और उनसे जुड़े रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच की बात भी कही गई है।

यह याचिका ऐसे समय दाखिल हुई है जब चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े फैसलों को लेकर कथित मतभेद की रिपोर्ट सामने आई है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें Form 6 में बदलाव, मतदाता नाम जोड़ने-हटाने और चुनावी डेटा के प्रबंधन से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कहा है कि SIR सहित उसके फैसले निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए गए और आयोग की ओर से इन्हें सर्वसम्मत बताया गया है। इसलिए फिलहाल याचिका में लगाए गए आरोपों और चुनाव आयोग के पक्ष के बीच अंतर बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका का आगे क्या रुख रहता है, इस पर न्यायिक कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।

इस बीच SIR को लेकर महाराष्ट्र में भी बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिनमें CEC से जुड़े 14 प्रशासनिक आदेशों को चुनौती देने और हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने जैसी मांगें शामिल हैं।