मेक इन इंडिया के 12 साल: पीएम मोदी ने बताई 5500% बढ़े रक्षा निर्यात की कहानी
मेक इन इंडिया पहल के 12 वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में बढ़ते उत्पादन, निवेश और निर्यात को रेखांकित किया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार रक्षा निर्यात 2013-14 के ₹686 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹38,424 करोड़ हो गया, जबकि देश में मोबाइल फोन निर्माण और PLI योजनाओं के जरिए घरेलू उत्पादन क्षमता में भी विस्तार हुआ है।
UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली, 25 सितंबर 2026 ‘मेक इन इंडिया’ पहल के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अभियान के प्रभाव और भारत में विनिर्माण क्षेत्र में आए बदलावों को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा संदेश में कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत में अधिक उत्पादन, अधिक निवेश और अधिक निर्यात देखने को मिला है। उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में दिखाई दे रहे बदलावों को इस पहल से जोड़ते हुए एक वीडियो और अन्य सामग्री साझा की।
मेक इन इंडिया की शुरुआत 25 सितंबर 2014 को भारत को विनिर्माण, डिजाइन और नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से की गई थी। सरकार के अनुसार इस अवधि में इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, स्टील, रेलवे और रक्षा सहित कई क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता बढ़ी है। साथ ही घरेलू स्तर पर कंपोनेंट, मशीनरी, रणनीतिक सामग्री और उन्नत तकनीकों के निर्माण की क्षमता विकसित हुई है।
रक्षा क्षेत्र में निर्यात वृद्धि को इस बदलाव के प्रमुख आंकड़ों में शामिल किया गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक रक्षा निर्यात 2013-14 में ₹686 करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर ₹38,424 करोड़ हो गया। इस तरह 12 वर्षों की अवधि में रक्षा निर्यात में 5,500 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि में भारत की घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमता भी बढ़ी और वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।
मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार की Production Linked Incentive यानी PLI योजनाओं को भी महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार विभिन्न PLI योजनाओं के तहत अब तक ₹15.2 लाख करोड़ से अधिक का निर्यात सक्षम हुआ है। बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में मोबाइल फोन उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार के अनुसार भारत में इस्तेमाल होने वाले करीब 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन अब देश में ही निर्मित होते हैं।
मोबाइल फोन विनिर्माण में भारत की स्थिति भी पिछले वर्षों में बदली है। सरकारी जानकारी के अनुसार भारत अब मात्रा के आधार पर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है। 2025 में स्मार्टफोन भारत के प्रमुख निर्यात उत्पादों में शामिल रहा। मोबाइल फोन निर्माण और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए PLI-LSEM के बाद मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को भी आगे बढ़ाया गया है।
मेक इन इंडिया के अगले चरण में सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन और निवेश को बढ़ाने पर जोर दिया है। सरकारी पृष्ठभूमि सामग्री के अनुसार ‘मेक इन इंडिया 2.0’ के तहत 27 सेक्टर पर ध्यान दिया जा रहा है, जिनमें 15 मैन्युफैक्चरिंग और 12 सर्विस सेक्टर शामिल हैं। निवेश प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के लिए नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम, पीएम गतिशक्ति और इंडिया इंडस्ट्रियल लैंड बैंक जैसी पहलों का भी उपयोग किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मेक इन इंडिया को केवल उत्पादन बढ़ाने की पहल के बजाय बुनियादी ढांचे, उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देने वाली प्रक्रिया के रूप में रेखांकित किया। उनके अनुसार इन क्षेत्रों के विकास से भारत की आर्थिक वृद्धि और समृद्धि के लिए आधार तैयार होता है।
इस तरह मेक इन इंडिया के 12 वर्षों में रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों में उत्पादन तथा निर्यात से जुड़े कई प्रमुख आंकड़े सामने आए हैं। सरकार की ओर से जारी आंकड़े इस अवधि में घरेलू विनिर्माण क्षमता और निर्यात आधार में हुए विस्तार को दर्शाते हैं।