मवेशियों के जमावड़े से राहगीर परेशान, रात में धान की फसल रौंद रहे आवारा पशु; कांजी हाउस शुरू करने की मांग
लोरमी तहसील के लगरा, खपरीकलां और चिल्फी क्षेत्र के बड़े पुलों पर आवारा मवेशियों के जमावड़े से राहगीरों और स्कूली बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि रात में यही मवेशी खेतों में घुसकर धान की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ग्रामीणों ने बंद कांजी हाउसों को दोबारा शुरू करने की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. राकेश भास्कर, मुंगेली l लोरमी तहसील क्षेत्र के ग्राम लगरा, खपरीकलां और चिल्फी के आसपास इन दिनों आवारा मवेशियों की समस्या ग्रामीणों और राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। क्षेत्र के बड़े पुलों पर बड़ी संख्या में मवेशियों के जमा रहने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों के अनुसार पुलों पर दिनभर मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है, जिसके कारण वाहन चालकों, राहगीरों और विशेष रूप से स्कूली बच्चों को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पुलों पर पशुओं की मौजूदगी के चलते कभी भी दुर्घटना की स्थिति बनने की आशंका भी बनी रहती है।
ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि आवारा मवेशियों की समस्या केवल सड़कों और पुलों तक सीमित नहीं है। दिन के समय पुलों और सड़क किनारे बैठे रहने वाले ये पशु रात होते ही आसपास के खेतों में पहुंच जाते हैं। इस समय खेतों में धान की फसल लहलहा रही है और मवेशियों के खेतों में घुसने से फसल को नुकसान पहुंच रहा है। किसानों का कहना है कि फसल को बचाने के लिए उन्हें रात-रातभर जागकर खेतों की निगरानी करनी पड़ रही है। इससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है और उनकी मेहनत पर भी असर पड़ रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक कई पशुपालक अपने मवेशियों को खुले में छोड़ देते हैं। देखरेख के अभाव में ये पशु निराश्रित होकर गांव और आसपास के क्षेत्रों में घूमते रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहले आवारा मवेशियों को नियंत्रित करने के लिए गांवों में कांजी हाउस की व्यवस्था होती थी। ऐसे स्थानों पर निराश्रित और खुले में घूमने वाले मवेशियों को रखा जाता था, लेकिन वर्तमान में कई कांजी हाउस बंद पड़े हैं। इसके कारण आवारा पशुओं की संख्या और उनसे जुड़ी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।
किसानों का कहना है कि खरीफ सीजन में धान की फसल किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। फसल तैयार करने में किसान महीनों मेहनत करते हैं, ऐसे में आवारा मवेशियों के कारण खेतों में नुकसान होने से उनकी चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। एक ओर उन्हें फसल की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त समय देना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर सड़क और पुलों पर मवेशियों के जमावड़े से आम लोगों की परेशानी भी बढ़ रही है।
स्थानीय ग्रामीणों और किसानों ने शासन-प्रशासन से इस समस्या का जल्द समाधान करने की मांग की है। उनका कहना है कि बंद पड़े कांजी हाउसों को पुनः शुरू किया जाए और आवारा तथा निराश्रित मवेशियों को वहां रखने की उचित व्यवस्था की जाए। साथ ही पशुपालकों को अपने मवेशियों की जिम्मेदारी लेने के लिए जागरूक किया जाए। ग्रामीणों का मानना है कि प्रशासन द्वारा समय रहते प्रभावी व्यवस्था किए जाने से किसानों की धान की फसल को बचाया जा सकता है और पुलों तथा सड़कों पर मवेशियों के जमावड़े से राहगीरों को होने वाली परेशानी भी कम होगी।