आदिवासी समाज के पदाधिकारियों के अनुसार लंबे समय से बच्चों की मौत के मामले को लेकर धरना प्रदर्शन, ज्ञापन और आवेदन के माध्यम से शासन प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया जा रहा है। इसके बावजूद मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए अब जिला मुख्यालय पर व्यापक आंदोलन की तैयारी की गई है। समाज का कहना है कि यह बंद केवल विरोध दर्ज कराने के लिए नहीं बल्कि आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और बच्चों की मौत के मामले में जिम्मेदारी तय कराने की मांग को लेकर किया जा रहा है।
समाज ने स्पष्ट किया है कि 3 सितंबर को प्रस्तावित बंद के दौरान आवश्यक और आपातकालीन सेवाओं को इससे मुक्त रखा जाएगा। अस्पताल, एंबुलेंस, दवा दुकान, स्कूल, कॉलेज और रसोई गैस जैसी सेवाएं बंद के दायरे में नहीं रहेंगी। वहीं बाजार, व्यापारिक प्रतिष्ठान, बस और अन्य परिवहन सेवाएं, सब्जी मंडी सहित अधिकांश व्यावसायिक गतिविधियों को बंद रखने की अपील की गई है। आदिवासी समाज के अनुसार विभिन्न व्यापारी संगठनों, ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन, बस एसोसिएशन और मंडी व्यापारी संघ सहित अन्य संगठनों से बंद को समर्थन मिला है।
बालाघाट बंद के दौरान धरना स्थल पर आमसभा आयोजित की जाएगी। इसके बाद आदिवासी समाज और विभिन्न संगठनों की ओर से नगर में रैली निकाली जाएगी। प्रस्तावित रैली धरना स्थल से जय स्तंभ चौक, बिरसा मुंडा चौक, जिला अस्पताल, रानी अवंती बाई चौक, काली पुतली चौक, मेन मार्केट, हनुमान चौक, सर्किट हाउस रोड, अंबेडकर चौक, एलआईसी और विश्वेश्वरैया चौक होते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचेगी। यहां संयुक्त रूप से ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से शासन प्रशासन को अवगत कराया जाएगा।
आदिवासी समाज की प्रमुख मांगों में जिला स्वास्थ्य विभाग और मुख्य चिकित्सा अधिकारी सहित प्रभावित क्षेत्रों के बीएमओ के खिलाफ कार्रवाई, बच्चों की मौत के मामले में जिम्मेदारी तय करना और प्रभावित परिवारों को दी जा रही मुआवजा राशि बढ़ाना शामिल है। समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उनका कहना है कि केवल आर्थिक सहायता पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों की मौत के कारणों की जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
आदिवासी समाज ने स्पष्ट किया है कि 3 सितंबर का बालाघाट बंद एक दिन के लिए रहेगा, लेकिन धरना प्रदर्शन इसके बाद भी जारी रहेगा। मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आगे और व्यापक करने की चेतावनी दी गई है। पत्रकार वार्ता में यह भी कहा गया कि आगे की आंदोलन रणनीति पर निर्णय धरना और बंद के दौरान लिया जाएगा।
बच्चों की मौत का मामला पिछले कई दिनों से बालाघाट जिले में चर्चा और विरोध का विषय बना हुआ है। विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों की ओर से स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार, मामले की जांच और प्रभावित परिवारों को पर्याप्त सहायता उपलब्ध कराने की मांग उठाई जा रही है। अब 3 सितंबर को प्रस्तावित बंद और रैली के जरिए आदिवासी समाज इस मुद्दे को जिला मुख्यालय तक मजबूती से उठाने की तैयारी में है।