विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर प्रदेशभर में चला जागरूकता अभियान, बच्चों के अधिकारों पर दिया गया जोर

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ में महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रम विभाग और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त प्रयास से व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान के माध्यम से बाल श्रम उन्मूलन, बच्चों की शिक्षा और उनके अधिकारों के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक किया गया।

Jun 13, 2026 - 11:57
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विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर प्रदेशभर में चला जागरूकता अभियान, बच्चों के अधिकारों पर दिया गया जोर

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ में बाल श्रम उन्मूलन और बच्चों के अधिकारों के संरक्षण को लेकर व्यापक जन-जागरूकता अभियान संचालित किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रम विभाग तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस अभियान का उद्देश्य समाज को बाल श्रम के दुष्परिणामों से अवगत कराना और बच्चों को शिक्षा एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

प्रदेश के विभिन्न शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित इस अभियान के तहत लोगों को बताया गया कि बाल श्रम बच्चों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। अधिकारियों ने समझाया कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का अधिकार प्राप्त है तथा इन अधिकारों की रक्षा करना समाज और शासन दोनों की जिम्मेदारी है।

अभियान के दौरान विभिन्न जिलों में होटल, ढाबा, दुकान, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और मोटर वाहन गैराजों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान संचालकों को बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि बच्चों से श्रम कराना कानूनन अपराध है और इसके लिए दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। अधिकारियों ने सभी व्यवसायियों से अपने कार्यस्थलों को बाल श्रम मुक्त बनाए रखने का आग्रह किया।

ग्रामीण क्षेत्रों में चौपाल, जनसंवाद और जागरूकता बैठकों के माध्यम से अभिभावकों एवं ग्रामीणों को बच्चों की शिक्षा और समग्र विकास के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। लोगों को समझाया गया कि बच्चों का भविष्य शिक्षा से जुड़ा हुआ है और उन्हें मजदूरी या अन्य श्रम कार्यों में लगाने के बजाय विद्यालय भेजना आवश्यक है। शिक्षा के माध्यम से ही बच्चों को बेहतर अवसर मिल सकते हैं और समाज के विकास को गति मिल सकती है।

अभियान के अंतर्गत नालसा की बच्चों के लिए बाल अनुकूल कानूनी सेवाएं योजना-2024 सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों और सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि बच्चों के संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्वास के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना है।

अधिकारियों ने कहा कि बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त करने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग, अभिभावकों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। यदि किसी स्थान पर बाल श्रम की घटना दिखाई दे तो इसकी जानकारी संबंधित विभागों को देना नागरिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।

इस अवसर पर नागरिकों से अपील की गई कि वे बच्चों के अधिकारों के संरक्षण में सहयोग करें और उन्हें शिक्षा, सुरक्षा तथा सम्मानजनक जीवन का अवसर दिलाने में अपनी भूमिका निभाएं। अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज में संवेदनशीलता बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक बच्चा श्रम से मुक्त होकर शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के अवसरों के साथ अपना भविष्य सुरक्षित बना सके।