कंगना रनौत की कथित टिप्पणी पर रायपुर में शिकायत, निष्पक्ष जांच और FIR की मांग
रायपुर के सिविल लाइन थाने में मानवाधिकार न्याय सुरक्षा संगठन ने सांसद कंगना रनौत की छात्रों और Gen-Z युवाओं पर कथित टिप्पणी को लेकर ज्ञापन सौंपा। संगठन ने मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक होने पर भारतीय न्याय संहिता और अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l राजधानी रायपुर के सिविल लाइन थाना में मानवाधिकार न्याय सुरक्षा संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने सांसद कंगना रनौत द्वारा जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं और Gen-Z युवाओं को लेकर की गई कथित टिप्पणी के संबंध में ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो भारतीय न्याय संहिता (BNS), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) तथा अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
संगठन की ओर से प्रदेश अध्यक्ष पूनम पांडेय के नेतृत्व में सिविल लाइन थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में कहा गया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने तथा विरोध दर्ज कराने का अधिकार प्राप्त है। ऐसे में किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं या युवाओं के लिए कथित रूप से आपत्तिजनक और अमर्यादित भाषा का प्रयोग करना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि सांसद कंगना रनौत ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंच पर दिए गए अपने कथित बयान में Gen-Z पीढ़ी की परवरिश को लेकर टिप्पणी करते हुए उन्हें “गट्ठर छाप परवरिश” जैसे शब्दों से संबोधित किया। संगठन का कहना है कि यदि ऐसा बयान दिया गया है तो इससे देश के युवाओं, छात्र-छात्राओं और महिलाओं की गरिमा प्रभावित होती है तथा समाज में नकारात्मक संदेश जाता है।
मानवाधिकार न्याय सुरक्षा संगठन ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर जांच कराई जाए। यदि जांच के दौरान आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत विधिसम्मत कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज की जाए। संगठन का कहना है कि कानून सभी नागरिकों के लिए समान है और किसी भी सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति के बयान की भी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। ऐसे में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के संबंध में किसी भी प्रकार की कथित अपमानजनक टिप्पणी सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती है। संगठन ने पुलिस प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
पूनम पांडेय ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि संगठन ने सिविल लाइन थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में कथित टिप्पणी सही पाई जाती है तो भारतीय न्याय संहिता और अन्य लागू कानूनों के तहत एफआईआर दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर न्याय नहीं मिलता है तो संगठन न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के अन्य पदाधिकारी और सदस्य भी उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से मांग की कि मामले की जांच पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ की जाए तथा उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर कानून के अनुरूप आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इससे लोकतांत्रिक मूल्यों और कानून के शासन में लोगों का विश्वास और मजबूत होगा।