रायपुर के संकट मोचन हनुमान मंदिर के महंत मनोहर दास का निधन, अमरकंटक में होगा अंतिम संस्कार
रायपुर रेलवे स्टेशन स्थित श्री सर्व धर्म संकट मोचन हनुमान मंदिर के प्रधान पुजारी एवं महंत मनोहर दास का 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। करीब 50 वर्षों तक मंदिर की सेवा करने वाले संत को अमरकंटक स्थित नर्मदा तट पर सनातन संन्यासी परंपरा के अनुसार अंतिम विदाई दी जाएगी।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l राजधानी रायपुर के रेलवे स्टेशन परिसर स्थित श्री सर्व धर्म संकट मोचन हनुमान मंदिर के प्रधान पुजारी एवं महंत मनोहर दास (सीताराम बाबा) का 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से राजधानी सहित प्रदेशभर के संत समाज, श्रद्धालुओं और मंदिर सेवा समिति में शोक की लहर है। लगभग पांच दशकों तक उन्होंने मंदिर में रहकर हनुमान जी की सेवा और श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया।
मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार महंत मनोहर दास ने अपना संपूर्ण जीवन धार्मिक सेवा, आध्यात्मिक साधना और लोककल्याण के कार्यों को समर्पित किया। रेलवे स्टेशन परिसर स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर में प्रतिदिन आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए वे आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र थे। उनके सादगीपूर्ण व्यक्तित्व और सहज व्यवहार ने उन्हें लोगों के बीच विशेष सम्मान दिलाया।
महंत मनोहर दास निर्वाणी अखाड़े की सनातन परंपरा से जुड़े हुए थे। उनके निधन के बाद अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार उनके पार्थिव शरीर को अमरकंटक स्थित पवित्र नर्मदा नदी के तट पर ले जाया जाएगा, जहां संत समाज और अखाड़े के साधु-संतों की उपस्थिति में विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया जाएगा।
मंदिर सेवा समिति ने बताया कि महंत मनोहर दास पिछले लगभग 50 वर्षों से संकट मोचन हनुमान मंदिर की सेवा कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने केवल पूजा-अर्चना ही नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन भी दिया। उनके सान्निध्य में अनेक धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते रहे।
मंदिर सेवा समिति के संस्थापक एवं समाजसेवी कुबेर राठी ने महंत मनोहर दास के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनका निधन मंदिर परिवार और पूरे समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि महंत मनोहर दास केवल एक संत नहीं, बल्कि सभी के मार्गदर्शक और अभिभावक थे। उनका जीवन सादगी, सेवा और भक्ति का प्रेरणादायक उदाहरण था।
महंत मनोहर दास के निधन की सूचना मिलते ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लग गया। बड़ी संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे और श्रद्धांजलि अर्पित की। विभिन्न मठों के संत, महंत, उनके गुरु भाई, मंदिर सेवा समिति के पदाधिकारी और स्थानीय नागरिकों ने भी उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
धार्मिक एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि महंत मनोहर दास का योगदान लंबे समय तक याद रखा जाएगा। उन्होंने अपने जीवन के माध्यम से सेवा, समर्पण और आध्यात्मिक मूल्यों का संदेश दिया। उनके सान्निध्य में अनेक लोगों ने धर्म और मानव सेवा की प्रेरणा प्राप्त की।
महंत मनोहर दास के निधन को रायपुर के धार्मिक और आध्यात्मिक जगत के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। श्रद्धालुओं का मानना है कि उनकी शिक्षाएं, सेवा भावना और आध्यात्मिक विरासत आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती रहेगी। अमरकंटक में होने वाले अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में संत समाज, श्रद्धालुओं और अनुयायियों के शामिल होने की संभावना है।