सरकारी शिक्षिका पर चिटफंड चलाने का आरोप, शिक्षा विभाग में हड़कंप
दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक स्थित गोरखा के शासकीय स्कूल की शिक्षिका कल्पना सेन पर चिटफंड कंपनी में सक्रिय रूप से शामिल होने का आरोप लगा है। छात्र-पालक संघ ने इसकी शिकायत शिक्षा विभाग में दर्ज कराई है। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने शिकायत की पुष्टि करते हुए जांच शुरू कर दी है। अभिभावकों का कहना है कि ऐसे मामलों में तत्काल सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि शिक्षकों द्वारा शिक्षा को पार्ट-टाइम नौकरी की तरह न लिया जाए।
UNITED NEWS OF ASIA. हेमंत पाल, दुर्ग। जिले के शिक्षा विभाग में लापरवाही और जवाबदेही की कमी एक बार फिर उजागर हुई है। धमधा विकासखंड के ग्राम गोरखा स्थित शासकीय प्राथमिक/मध्य विद्यालय की शिक्षिका कल्पना सेन पर गंभीर आरोप लगा है कि वे सरकारी सेवा में रहते हुए चिटफंड कंपनी के कारोबार में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई थीं। यह आरोप छात्र-पालक संघ अध्यक्ष द्वारा लिखित शिकायत के माध्यम से लगाया गया है।
शिकायत में कहा गया है कि शिक्षिका ने कई ग्रामीणों और अभिभावकों को चिटफंड से जुड़े निवेश कार्यों के लिए प्रेरित किया। जो न केवल राजपत्रित कर्मचारी आचार संहिता का उल्लंघन है, बल्कि शिक्षक की पेशेवर निष्ठा और छात्रों के भविष्य के प्रति जिम्मेदारी पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
मामले की पुष्टि करते हुए ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, धमधा अथर्व शर्मा ने बताया—
“गोरखा स्कूल की शिक्षिका के खिलाफ शिकायत प्राप्त हुई है। यह मामला संज्ञान में है। जांच प्रारंभ कर दी गई है। रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”
स्थानीय अभिभावकों ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि जब सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की जिम्मेदारी पहले से चुनौतीपूर्ण है, ऐसे में कुछ शिक्षक सरकारी नौकरी को पार्ट-टाइम की तरह समझकर निजी कमाई में लगे हुए हैं, जिसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है।
गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में दुर्ग जिले में नकली डिग्री, फर्जी उपस्थिति, और निजी व्यवसाय में शामिल सरकारी शिक्षकों के कई मामले सामने आए हैं, जिससे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हैं।
ऐसे में बड़ा सवाल यही है —
क्या शिक्षा विभाग में ‘सेवा’ की जगह ‘कमाई’ प्राथमिकता बनती जा रही है?