टीएमसी में बढ़ी अंदरूनी कलह, 20 सांसदों के अलग गुट बनाने की अटकलें तेज

तृणमूल कांग्रेस में कथित असंतोष के बीच 20 सांसदों के अलग गुट बनाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। वहीं 14 बागी सांसदों की मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात ने पश्चिम बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।

Jun 8, 2026 - 16:12
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टीएमसी में बढ़ी अंदरूनी कलह, 20 सांसदों के अलग गुट बनाने की अटकलें तेज

UNITED NEWS OF ASIA. पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर कथित असंतोष और बगावत की खबरों ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की मुश्किलें उस समय और बढ़ती नजर आईं जब पार्टी के कई सांसदों के अलग गुट बनाने की संभावनाओं की खबरें सामने आने लगीं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, टीएमसी के करीब 20 सांसद अलग रणनीति पर विचार कर रहे हैं और जल्द ही अपने अगले कदम की घोषणा कर सकते हैं।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दिल्ली में विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल होने पहुंचे थे। दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी दिल्ली में मौजूद रहे और कथित तौर पर टीएमसी के असंतुष्ट सांसदों से मुलाकात की।

जानकारी के अनुसार, टीएमसी के 14 सांसदों का एक समूह दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के निवास पर सुवेंदु अधिकारी से मिला। इस मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रहे असंतोष को लेकर सांसदों के बीच लगातार चर्चा हो रही है।

सूत्रों के मुताबिक, सांसदों के एक समूह ने दिल्ली में अलग से बैठक भी की, जिसमें पार्टी की भावी रणनीति और संगठनात्मक स्थिति पर चर्चा हुई। खबर है कि कुछ सांसद लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर सामूहिक रूप से अपना पक्ष रखने पर भी विचार कर रहे हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

इस बीच टीएमसी को एक और झटका तब लगा जब राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने के साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी दूरी बना ली। उनके इस्तीफे को पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में सांसद पार्टी से अलग होते हैं तो इसका प्रभाव न केवल पश्चिम बंगाल की राजनीति पर पड़ेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकजुटता पर भी असर पड़ सकता है। टीएमसी वर्तमान में लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में महत्वपूर्ण उपस्थिति रखती है और किसी भी प्रकार की टूट पार्टी की राजनीतिक ताकत को प्रभावित कर सकती है।

हालांकि टीएमसी की ओर से इन खबरों पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व इस चुनौती से कैसे निपटता है और क्या कथित बागी सांसद वास्तव में अलग गुट बनाने की दिशा में आगे बढ़ते हैं या नहीं।