बक्सर राजपूत क्षत्रिय समाज में सदस्यता शुल्क और बहिष्कार को लेकर विवाद गहराया
बक्सर राजपूत क्षत्रिय समाज में सदस्यता शुल्क, नियमावली के पालन और सामाजिक बहिष्कार को लेकर विवाद गहरा गया है। समाज के कुछ सदस्यों ने वर्तमान पदाधिकारियों पर बायलाज की अनदेखी और मनमानी का आरोप लगाया है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ के बक्सर राजपूत क्षत्रिय समाज पंजीयन क्रमांक 3738 में सदस्यता शुल्क, नियमावली (बायलाज) के पालन और सामाजिक बहिष्कार को लेकर विवाद गहरा गया है। समाज के कुछ वरिष्ठ सदस्यों ने वर्तमान पदाधिकारियों पर मनमाने निर्णय लेने तथा पंजीकृत नियमावली की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
आरोप है कि समाज के वर्तमान नेतृत्व द्वारा ऐसे लोगों को भी सामाजिक बहिष्कार की चेतावनी दी जा रही है, जिन्हें समाज का नियमित सदस्य तक नहीं माना गया है। इसके साथ ही 18 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक पुरुष और महिला सदस्य से 50 रुपये सदस्यता शुल्क वसूले जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
विरोध कर रहे सदस्यों का कहना है कि जब समाज की नियमावली में निर्धारित प्रावधानों के बारे में जानकारी मांगी जाती है या बायलाज की प्रति उपलब्ध कराने का अनुरोध किया जाता है, तब संबंधित व्यक्तियों को समाज विरोधी गतिविधियों में शामिल बताकर सदस्यता से वंचित किया जाता है। इतना ही नहीं, उन्हें सामाजिक एवं पारिवारिक आयोजनों में शामिल होने से रोकने के प्रयास भी किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।
वरिष्ठ सदस्यों का दावा है कि पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष के कार्यकाल में सदस्यता शुल्क 50 रुपये से घटाकर 10 रुपये निर्धारित किया गया था। इसी शुल्क के आधार पर पूरे समाज में सदस्यता अभियान चलाया गया और चुनाव भी संपन्न हुए थे। ऐसे में केंद्रीय समिति की स्वीकृति के बिना पुनः 50 रुपये शुल्क लागू करना नियमों के विपरीत बताया जा रहा है।
विवाद का एक अन्य पक्ष महिलाओं से सदस्यता शुल्क वसूले जाने को लेकर भी सामने आया है। आरोप है कि समाज की पंजीकृत नियमावली में महिलाओं के लिए सदस्यता शुल्क का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है, फिर भी बिना किसी प्रस्ताव और अनुमोदन के उनसे भी शुल्क लिया जा रहा है।
समाज के कुछ सदस्यों ने यह भी कहा है कि सदस्यता शुल्क को आय का प्रमुख माध्यम बनाना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि यदि संगठन को आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता है, तो नियमावली में वर्णित संरक्षक एवं आजीवन सदस्यता जैसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए।
सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया है कि समाज की आय-व्यय संबंधी जानकारी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। साथ ही पंजीयक कार्यालय द्वारा वर्ष 2024 में अध्यक्ष और सचिव को जारी किए गए दो पत्रों का जवाब भी लंबे समय तक नहीं दिया गया।
विवाद को और गंभीर बनाते हुए समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने बताया कि वर्ष 2022 में केंद्रीय अध्यक्ष और क्षेत्रीय पदाधिकारियों को 16 बिंदुओं का आरोप पत्र सौंपा गया था। उनका कहना है कि आज तक उन आरोपों का न तो जवाब दिया गया और न ही कोई समाधान निकाला गया।
समाज के असंतुष्ट सदस्यों ने अब इन मुद्दों को सार्वजनिक करते हुए पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमावली के अनुरूप कार्यवाही की मांग की है। उनका कहना है कि समाज की एकता और संगठन की गरिमा बनाए रखने के लिए सभी निर्णय नियमों के अनुसार और सदस्यों की सहमति से लिए जाने चाहिए।