UNITED NEWS OF ASIA. अली खान बलरामपुर l छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से पर्यावरण और वन संरक्षण को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। जिले के वाड्राफनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत फूलीडूमर क्षेत्र के जंगलों में कथित रूप से विराट राइस मिल का डस्ट डंप किए जाने की खबर ने स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों की चिंता बढ़ा दी है। आरोप है कि जंगल के भीतर बड़े पैमाने पर राइस मिल से निकलने वाले अवशेष और धूलनुमा कचरे को फेंका जा रहा है, जिससे वनस्पतियों और वन्यजीवों के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न हो गया है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से जंगल क्षेत्र में यह डंपिंग का कार्य जारी है। राइस मिल से निकलने वाला डस्ट और अपशिष्ट खुले तौर पर जंगल में डाला जा रहा है, जिसके कारण पौधे सूखने लगे हैं और वन्यजीवों का प्राकृतिक वातावरण प्रभावित हो रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार के अपशिष्ट में मौजूद सूक्ष्म कण मिट्टी की गुणवत्ता को खराब कर सकते हैं, जिससे पेड़-पौधों की वृद्धि पर नकारात्मक असर पड़ता है।
मामले को लेकर स्थानीय वन विभाग के कर्मचारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि संबंधित वनपाल और वनरक्षक पर पूर्व में भी जंगल क्षेत्र में अवैध कब्जा कराने और अनियमितताओं को संरक्षण देने के आरोप लग चुके हैं। अब इस नए मामले के सामने आने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते कार्रवाई की जाती, तो जंगल की यह स्थिति नहीं होती।
इस मामले में वन परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर) और एसडीओ की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में जंगल के भीतर डंपिंग बिना विभागीय जानकारी के संभव नहीं है। यही कारण है कि विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
मामला मीडिया और प्रशासन तक पहुंचने के बाद बलरामपुर वन मंडल के डीएफओ आलोक बाजपेयी ने इसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने मामले की जांच के लिए टीम गठित करने की बात कही है। डीएफओ ने स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा विभाग की प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हालांकि अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस मामले में वास्तव में निष्पक्ष जांच होगी या फिर यह गंभीर मुद्दा भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। क्षेत्र के लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस बार ठोस कदम उठाएगा और जंगलों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
पर्यावरण संरक्षण को लेकर लगातार बढ़ती चिंताओं के बीच यह मामला प्रशासन और वन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट क्या खुलासा करती है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।