UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l भारत में थैलेसीमिया एक गंभीर आनुवंशिक रक्त विकार के रूप में तेजी से चिंता का विषय बनता जा रहा है। यह बीमारी खासतौर पर तब अधिक खतरनाक हो जाती है, जब इसके साइलेंट कैरियर यानी ऐसे लोग जिन्हें स्वयं कोई लक्षण नहीं होते, अनजाने में यह जीन अपनी अगली पीढ़ी तक पहुंचा देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विवाह-पूर्व जांच को प्राथमिकता दी जाए, तो इस बीमारी के गंभीर मामलों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
नारायणा एमएमआई हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट जनरल मेडिसिन डॉ. मुकेश कुमार शर्मा के अनुसार, थैलेसीमिया ट्रेट के कैरियर सामान्य व्यक्ति की तरह पूरी तरह स्वस्थ दिखाई देते हैं। उन्हें किसी प्रकार की शारीरिक समस्या महसूस नहीं होती और अधिकांश लोगों को यह भी पता नहीं होता कि वे इस बीमारी के जीन को वहन कर रहे हैं। यही कारण है कि कई बार दो कैरियर व्यक्तियों के विवाह के बाद थैलेसीमिया मेजर से प्रभावित बच्चे का जन्म होता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि विवाह-पूर्व जांच एक बेहद सरल रक्त परीक्षण है, जिसके माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है कि कोई व्यक्ति थैलेसीमिया का कैरियर है या नहीं। यदि दोनों जीवनसाथी कैरियर पाए जाते हैं, तो उन्हें चिकित्सकीय सलाह और आनुवंशिक जोखिम के बारे में सही जानकारी मिल सकती है। इससे वे परिवार शुरू करने से पहले सोच-समझकर निर्णय ले सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस जांच का उद्देश्य विवाह को रोकना नहीं, बल्कि भविष्य में होने वाली गंभीर परेशानियों से बचाव करना है।
डॉ. शर्मा के अनुसार यदि दोनों साथी थैलेसीमिया कैरियर हों, तो हर गर्भावस्था में लगभग 25 प्रतिशत संभावना रहती है कि बच्चा थैलेसीमिया मेजर से प्रभावित होगा। ऐसे बच्चों को जीवनभर नियमित रूप से रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। साथ ही उन्हें बार-बार अस्पताल जाना पड़ता है और लगातार चिकित्सकीय निगरानी में रहना होता है। इससे परिवार पर भावनात्मक, शारीरिक और आर्थिक दबाव बढ़ जाता है।
भारत में लाखों लोग थैलेसीमिया के साइलेंट कैरियर हैं, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण बहुत कम लोग विवाह से पहले इसकी जांच करवाते हैं। कई परिवारों को इस बीमारी की जानकारी तब मिलती है, जब उनका बच्चा इससे प्रभावित होकर जन्म लेता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते जागरूकता फैलाई जाए और विवाह-पूर्व जांच को नियमित स्वास्थ्य परीक्षण का हिस्सा बनाया जाए, तो आने वाली पीढ़ियों को इस गंभीर बीमारी से बचाया जा सकता है।
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि थैलेसीमिया की जांच न केवल सरल और सस्ती है, बल्कि यह लंबे समय तक परिवारों को बड़ी परेशानियों से बचाने का प्रभावी तरीका भी है। एक छोटी-सी जांच भविष्य में होने वाले बड़े संकट को रोक सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार रोकथाम की शुरुआत माता-पिता बनने से पहले ही हो जानी चाहिए। विवाह-पूर्व जांच के जरिए दंपत्ति सही समय पर सही निर्णय ले सकते हैं और अपने बच्चों को स्वस्थ भविष्य दे सकते हैं।