विश्व अस्थमा दिवस 2026: छत्तीसगढ़ में बढ़ता अस्थमा बना गंभीर चिंता, विशेषज्ञों ने जागरूकता और उपचार पर दिया जोर

विश्व अस्थमा दिवस 2026 के अवसर पर विशेषज्ञों ने छत्तीसगढ़ में बढ़ते अस्थमा के मामलों को लेकर चिंता जताई है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रदूषण, धुआं और जागरूकता की कमी के कारण स्थिति गंभीर होती जा रही है। सही समय पर एंटी-इन्फ्लेमेटरी इनहेलर्स की उपलब्धता और नियमित उपचार से अस्थमा को नियंत्रित किया जा सकता है।

May 7, 2026 - 12:13
 0  2
विश्व अस्थमा दिवस 2026: छत्तीसगढ़ में बढ़ता अस्थमा बना गंभीर चिंता, विशेषज्ञों ने जागरूकता और उपचार पर दिया जोर

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l हर वर्ष मई के पहले मंगलवार को विश्व अस्थमा दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को अस्थमा जैसी गंभीर लेकिन नियंत्रित की जा सकने वाली बीमारी के प्रति जागरूक करना है। वर्ष 2026 में विश्व अस्थमा दिवस की थीम है — “अस्थमा से पीड़ित सभी लोगों के लिए एंटी-इन्फ्लेमेटरी इनहेलर्स की उपलब्धता अभी भी एक तात्कालिक आवश्यकता।” स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक संदेश नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी है।

नारायणा एमएमआई अस्पताल रायपुर के वरिष्ठ सलाहकार पल्मोनोलॉजी डॉ. दिपेश मास्के के अनुसार, भारत में लाखों लोग अस्थमा से प्रभावित हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में यह समस्या और अधिक गंभीर रूप ले रही है। रायपुर और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और वायु प्रदूषण ने सांस संबंधी बीमारियों को बढ़ावा दिया है। वहीं ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में लकड़ी और कोयले से खाना पकाने के कारण निकलने वाला धुआं बच्चों और महिलाओं के फेफड़ों को लगातार नुकसान पहुंचा रहा है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि खनन क्षेत्रों की धूल, कृषि से जुड़े एलर्जन और औद्योगिक प्रदूषण भी अस्थमा के मामलों को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में मरीज समय पर जांच नहीं कराते और केवल अस्थायी राहत देने वाली दवाओं पर निर्भर रहते हैं। कई लोग अब भी इनहेलर को लेकर भ्रम और मिथकों का शिकार हैं, जिसके कारण सही उपचार लेने से बचते हैं।

डॉ. मास्के का कहना है कि अस्थमा कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। सही उपचार और नियमित देखभाल से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि जरूरी उपचार और एंटी-इन्फ्लेमेटरी इनहेलर्स हर जरूरतमंद व्यक्ति तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। कई बार मरीजों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है और गंभीर स्थिति में जान का खतरा भी बन जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार एंटी-इन्फ्लेमेटरी इनहेलर्स केवल राहत देने का काम नहीं करते, बल्कि अस्थमा के गंभीर दौरे रोकने में भी मदद करते हैं। यदि इनका नियमित और सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि बार-बार खांसी, सांस फूलना या घरघराहट जैसी समस्याओं को नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और नियमित उपचार बेहद जरूरी है। साथ ही मरीजों और उनके परिवारों को इनहेलर के सही उपयोग के बारे में जागरूक होना चाहिए।

डॉक्टरों का मानना है कि सरकार को भी इस दिशा में गंभीर कदम उठाने की जरूरत है। हर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जरूरी इनहेलर्स की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने और शहरी वायु गुणवत्ता सुधारने पर भी विशेष ध्यान देना होगा।

विश्व अस्थमा दिवस 2026 के अवसर पर विशेषज्ञों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अस्थमा के खिलाफ लड़ाई केवल डॉक्टरों की नहीं, बल्कि समाज, सरकार और हर नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। सही समय पर उपचार और जागरूकता से लाखों लोगों का जीवन बेहतर बनाया जा सकता है, क्योंकि हर सांस वास्तव में मायने रखती है।