राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की त्वरित कार्रवाई से 16 बच्चों का रेस्क्यू, बाल श्रम मामले में एक नियोक्ता गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की त्वरित कार्रवाई से बाल श्रम के लिए ले जाए जा रहे 16 बच्चों को मात्र डेढ़ घंटे के भीतर सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। संयुक्त अभियान में स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (SJPU) और चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम ने बस को रोककर बच्चों को सुरक्षित संरक्षण में लिया। मामले में एक नियोक्ता को गिरफ्तार कर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।

Aug 6, 2026 - 15:30
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राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की त्वरित कार्रवाई से 16 बच्चों का रेस्क्यू, बाल श्रम मामले में एक नियोक्ता गिरफ्तार

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की त्वरित सक्रियता और संबंधित एजेंसियों के समन्वित प्रयास से बाल श्रम के लिए ले जाए जा रहे 16 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया। इस पूरी कार्रवाई को सूचना मिलने के महज डेढ़ घंटे के भीतर अंजाम दिया गया, जिससे बच्चों को संभावित शोषण और अवैध बाल श्रम से बचाया जा सका। मामले में एक नियोक्ता को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार, 5 अगस्त 2026 की शाम लगभग 7 बजे छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा को एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन (AVA) के माध्यम से सूचना मिली कि रायपुर से कुछ बच्चों को बस के जरिए बाल श्रम के उद्देश्य से दूसरे स्थान पर ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही आयोग ने तत्काल संज्ञान लिया और स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (SJPU), दुर्ग तथा चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम के साथ संयुक्त अभियान शुरू किया।

लगभग रात 8:30 बजे संयुक्त टीम ने संबंधित बस को रोककर सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। जांच के दौरान बस में कुल 16 बच्चे मिले, जिनमें से 7 बच्चे 14 से 16 वर्ष आयु वर्ग के नाबालिग हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार अधिकांश बच्चे बैगा जनजाति से संबंधित हैं तथा कुछ बच्चे राजनांदगांव और कबीरधाम जिलों के निवासी हैं। रेस्क्यू के बाद सभी बच्चों को आवश्यक देखभाल, काउंसलिंग और सुरक्षा प्रदान करने के लिए बाल आश्रय गृह में रखा गया है, जहां उनकी स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति का भी परीक्षण किया जा रहा है।

प्रारंभिक पूछताछ में यह तथ्य सामने आया कि बच्चों को कचन्दूर स्थित मॉडर्न एग्रो मशरूम में कार्य कराने के उद्देश्य से ले जाया जा रहा था। इस मामले में नियोक्ता लक्ष्मण पटेल को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 143(2), 143(3), 143(5) और 111(1) के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।

डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल श्रम, बाल तस्करी और बच्चों के किसी भी प्रकार के शोषण के मामलों में आयोग शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति के तहत कार्य करता है। उन्होंने कहा कि यदि जांच के दौरान अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

आयोग ने आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि यदि कहीं भी बाल श्रम, बाल तस्करी या बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन से जुड़ी कोई सूचना मिले तो उसकी तत्काल जानकारी संबंधित विभाग, स्थानीय प्रशासन या चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर दें। समय पर मिली सूचना बच्चों के जीवन को सुरक्षित बनाने और उन्हें शोषण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह त्वरित कार्रवाई एक बार फिर साबित करती है कि विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयास और सतर्क नागरिक समाज के सहयोग से बच्चों के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।