कपास के कम दाम पर किसानों का हंगामा, बोली में मिलीभगत का आरोप

बड़वानी कृषि उपज मंडी में कपास के कम भाव मिलने से नाराज किसानों ने नीलामी रुकवाकर मुख्य गेट बंद कर दिया। किसानों ने व्यापारियों पर बोली में कथित मिलीभगत और मंडी व्यवस्था में अनियमितता के आरोप लगाए। मंडी सचिव के आश्वासन के बाद नीलामी दोबारा शुरू हुई।

Sep 20, 2026 - 16:35
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कपास के कम दाम पर किसानों का हंगामा, बोली में मिलीभगत का आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. बड़वानी की स्थानीय कृषि उपज मंडी में रविवार को कपास के कम दाम मिलने से नाराज किसानों ने जमकर हंगामा किया। किसानों ने आरोप लगाया कि नीलामी के दौरान व्यापारियों की कथित मिलीभगत के कारण उनकी उपज के उचित भाव नहीं लगाए जा रहे हैं। विरोध में किसानों ने नीलामी प्रक्रिया को बीच में ही रुकवा दिया और मंडी का मुख्य गेट बंद कर दिया। इसके चलते करीब एक घंटे तक मंडी में खरीदी-बिक्री का काम प्रभावित रहा। बाद में मंडी सचिव के हस्तक्षेप और निष्पक्ष नीलामी का आश्वासन दिए जाने के बाद किसान शांत हुए और नीलामी प्रक्रिया दोबारा शुरू कराई गई।

रविवार को मंडी में कपास की बड़ी आवक हुई थी। जानकारी के अनुसार जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से 100 से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में किसान अपनी उपज लेकर मंडी पहुंचे थे। इन वाहनों में करीब 200 से 250 क्विंटल कपास होने की बात कही गई है। सुबह से ही मंडी परिसर में किसानों और व्यापारियों की मौजूदगी रही। नीलामी शुरू होने के बाद कपास के लिए लगाए जा रहे भाव को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ती गई। किसानों का कहना था कि उनकी उपज की गुणवत्ता के अनुरूप कीमत नहीं लगाई जा रही है।

किसान लाखन भावरे ने मंडी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए व्यापारियों पर बोली में आपसी सांठगांठ का आरोप लगाया। उनका कहना था कि व्यापारी कथित तौर पर इशारों में आपस में भाव तय कर लेते हैं, जिससे प्रतिस्पर्धी बोली की प्रक्रिया प्रभावित होती है। उन्होंने मंडी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि किसानों को लंबे समय तक धूप में खड़ा रहना पड़ता है, जबकि अंदर व्यापारियों के साथ कथित रूप से बातचीत चलती रहती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि समाचार में नहीं है।

राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के जिलाध्यक्ष अनिल असके ने कहा कि बड़वानी से करीब 10 से 12 किलोमीटर दूर अंजड़ मंडी में कपास के बेहतर भाव मिलने की जानकारी किसानों को मिल रही है। उनके अनुसार वहां कपास करीब 8,000 से 8,500 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है, जबकि बड़वानी मंडी में किसानों को 7,000 से 7,500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि कम बारिश के कारण इस वर्ष उत्पादन प्रभावित हुआ है और खेती की लागत भी बढ़ी है। किसानों का कहना है कि ऐसी स्थिति में उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलना चाहिए।

कुकरा राजघाट के किसान हितेश ने बताया कि वह करीब 6 क्विंटल कपास लेकर मंडी पहुंचे थे। उनके अनुसार पिछले सप्ताह समान गुणवत्ता के कपास का भाव 7,800 रुपये प्रति क्विंटल मिला था, जबकि इस बार उसी तरह की उपज के लिए करीब 6,800 रुपये और खराब गुणवत्ता वाले कपास के लिए 6,100 रुपये का भाव बताया गया। किसानों ने आरोप लगाया कि भाव में अचानक गिरावट आई है और कुछ व्यापारी कथित तौर पर सीमित दायरे में कीमत तय कर रहे हैं।

किसानों ने मांग की कि मंडी में बोली प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो और किसानों को उनकी उपज का उचित बाजार भाव मिले। अनिल असके ने समर्थन मूल्य से कम बोली लगाने और मंडी के बाहर अवैध खरीदी करने वाले व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई। मंडी सचिव के आश्वासन के बाद स्थिति सामान्य हुई, लेकिन किसानों ने कहा कि यदि भविष्य में भी उन्हें उचित मूल्य और पारदर्शी नीलामी नहीं मिली तो वे आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।