पाकिस्तान में दो नाबालिग हिंदू बहनों के कथित अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन का मामला
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में दो नाबालिग हिंदू बहनों के कथित अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और विवाह का मामला सामने आया है। परिवार और मानवाधिकार संगठन ने मामले की निष्पक्ष जांच तथा बच्चियों की सुरक्षा की मांग की है। अदालत में सुनवाई के दौरान दोनों ने कथित तौर पर परिवार के पास लौटने की इच्छा जताई, जिसके बाद उन्हें सेफ हाउस भेजने का आदेश दिया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. पाकिस्तान के सिंध प्रांत में दो नाबालिग हिंदू बहनों के कथित अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और विवाह का मामला सामने आया है। परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, दोनों बहनों को टंडो अल्लाहयार जिले की इब्राहिम कॉलोनी से कथित तौर पर ले जाया गया और बाद में उनका धर्म परिवर्तन कराकर दो मुस्लिम युवकों से विवाह करा दिया गया। मामले को लेकर मानवाधिकार संगठन वॉइस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी ने चिंता जताई है और दोनों बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग की है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों बहनें नाबालिग हैं और कच्ची कोल्ही समुदाय से संबंधित बताई गई हैं। परिवार का आरोप है कि बच्चियों को उनकी इच्छा के विरुद्ध घर से ले जाया गया। इसके बाद कथित तौर पर उनका धर्म परिवर्तन कराया गया और अमजद सोलंगी तथा मंसूर सोलंगी नाम के दो युवकों से उनका विवाह करा दिया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हुई है।
मामले की सुनवाई के दौरान दोनों बच्चियों को अदालत के सामने पेश किया गया। परिवार और मानवाधिकार संगठन से जुड़े पक्षों के मुताबिक, सुनवाई के दौरान बच्चियों ने भावुक होकर अपने घर वापस जाने की इच्छा जताई। अदालत ने उन्हें सीधे परिवार को सौंपने के बजाय सेफ हाउस भेजने का आदेश दिया। इस फैसले का उद्देश्य मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया के दौरान बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बताया गया है।
वॉइस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी ने मामले को लेकर चिंता जताते हुए अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है। संगठन का कहना है कि बच्चियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और पूरे घटनाक्रम की पारदर्शी तरीके से जांच होनी चाहिए। मानवाधिकार संगठनों की ओर से ऐसे मामलों में नाबालिगों की सुरक्षा, उनकी स्वतंत्र इच्छा और कानूनी संरक्षण को लेकर लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं।
परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया। रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत के बाहर और सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में दोनों बच्चियां अपने माता-पिता के पास लौटने की इच्छा जताती दिखाई दीं। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि और उसमें दिखाई दे रही परिस्थितियों की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए वीडियो में कही गई बातों को मामले की जांच और अदालत की कार्यवाही के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
फिलहाल मामले में बच्चियों की सुरक्षा और आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। आरोपों की वास्तविकता, कथित धर्म परिवर्तन और विवाह से जुड़े घटनाक्रम का अंतिम निर्धारण संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकेगा। मानवाधिकार संगठन ने भी इसी वजह से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। अदालत द्वारा दोनों नाबालिगों को सेफ हाउस भेजे जाने के बाद अब आगे की कार्यवाही पर नजर रहेगी।