राहुल गांधी ने छात्राओं के हॉस्टल का मुद्दा उठाया, सरकार से पूछा- दीये जलाने के लिए पैसा है तो हॉस्टल के लिए क्यों नहीं
इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के बाद राहुल गांधी ने छात्राओं के लिए हॉस्टल और शिक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे का मुद्दा उठाया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर दीये जलाने के अभियान का जिक्र करते हुए सरकार के खर्च को लेकर सवाल किया और ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों में पढ़ने आने वाली छात्राओं की आवास संबंधी समस्याओं पर ध्यान दिलाया।
UNITED NEWS OF ASIA. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्राओं के लिए हॉस्टल और शिक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। रविवार 20 सितंबर को सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने संदेश में राहुल गांधी ने इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान एक छात्रा की ओर से पूछे गए सवाल का जिक्र किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर देशभर में दीये जलाने के अभियान को छात्राओं की आवास संबंधी जरूरतों से जोड़ते हुए सरकार से सवाल किया कि यदि दीये जलाने के लिए पैसा है तो छात्रों के हॉस्टल के लिए क्यों नहीं है।
राहुल गांधी ने जिस छात्रा के सवाल का उल्लेख किया, उसके अनुसार वह गांव से उच्च शिक्षा के लिए शहर आई है। हॉस्टल उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे निजी पीजी में रहना पड़ता है और रहने तथा सुरक्षा पर काफी खर्च करना पड़ता है। राहुल गांधी ने अपने संदेश में इसी समस्या को रेखांकित करते हुए छात्राओं के लिए सुरक्षित और किफायती आवास की जरूरत का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई छात्राएं रहने की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ने के लिए मजबूर होती हैं।
राहुल गांधी ने युवाओं को देश के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि छात्रों के सवाल पूछने की क्षमता महत्वपूर्ण है। इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी बात रखी थी। भारतीय एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कार्यक्रम में राहुल गांधी ने शिक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए और अपने राजनीतिक दृष्टिकोण के तहत सरकार पर छात्रों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
हॉस्टल का मुद्दा खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों में उच्च शिक्षा के लिए आने वाली छात्राओं की परिस्थितियों से जुड़ा है। ऐसे विद्यार्थियों के लिए आवास की उपलब्धता, किराये का खर्च और सुरक्षा जैसे विषय पढ़ाई जारी रखने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। राहुल गांधी ने अपने संदेश में इसी संदर्भ को सामने रखते हुए छात्राओं के लिए बेहतर आवासीय सुविधाओं और वित्तीय सहायता की जरूरत पर सवाल उठाया।
इंदौर का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आयोजित किया गया था। कार्यक्रम से पहले आयोजन स्थल को लेकर भी विवाद सामने आया था। कांग्रेस ने पहले जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई थी, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के बाद आयोजन स्थल बदला गया। बाद में कार्यक्रम को आईडीए ग्राउंड में आयोजित किया गया। आयोजन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर भी पुलिस और कांग्रेस के बीच मतभेद सामने आए।
राहुल गांधी की ओर से उठाया गया हॉस्टल का मुद्दा अब छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा तक पहुंच, सुरक्षित आवास और सरकारी सहायता से जुड़ी व्यापक बहस का हिस्सा बन गया है। उनके बयान में मुख्य सवाल यह रहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों में पढ़ाई करने आने वाली छात्राओं के लिए पर्याप्त और किफायती हॉस्टल उपलब्ध कराने पर सरकारी स्तर पर कितना ध्यान दिया जा रहा है। यह बयान इंदौर में उनके छात्र संवाद कार्यक्रम के बाद सामने आया, जिसमें शिक्षा और छात्रों की समस्याओं को प्रमुख मुद्दों के रूप में उठाया गया था।