जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत, सीनियर डॉक्टर की गैरमौजूदगी पर उठे सवाल

जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान जच्चा और नवजात बच्चे की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों ने इलाज में लापरवाही और गलत इंजेक्शन दिए जाने की आशंका जताते हुए अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। परिजनों का आरोप है कि घटना के दौरान सीनियर डॉक्टर मौके पर मौजूद नहीं थे। मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से फिलहाल स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

Sep 20, 2026 - 11:22
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जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत, सीनियर डॉक्टर की गैरमौजूदगी पर उठे सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान जच्चा और नवजात बच्चे की मौत का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। घटना के बाद मृतका के परिजनों ने अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही बरते जाने का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि प्रसव के दौरान आवश्यक चिकित्सा व्यवस्था और वरिष्ठ डॉक्टर की मौजूदगी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। इसी बीच परिजनों ने आशंका जताई है कि कहीं गलत इंजेक्शन या उपचार में किसी तरह की चूक के कारण यह गंभीर स्थिति तो नहीं बनी। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

परिजनों के मुताबिक प्रसव के दौरान महिला की हालत बिगड़ने लगी थी। परिवार का आरोप है कि ऐसी गंभीर स्थिति में वरिष्ठ चिकित्सक मौके पर मौजूद नहीं थे और समय पर उचित उपचार को लेकर उन्हें जानकारी नहीं दी गई। जच्चा और बच्चे की मौत के बाद परिवार में आक्रोश का माहौल है। परिजन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि महिला और नवजात की मौत किन परिस्थितियों में हुई।

मामले में सबसे बड़ा सवाल उपचार के दौरान अपनाई गई चिकित्सा प्रक्रिया और अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सकीय व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। परिजनों ने गलत इंजेक्शन दिए जाने की आशंका भी जताई है। हालांकि किसी दवा या इंजेक्शन को मौत का कारण बताने के लिए मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार का विवरण और विशेषज्ञ जांच जरूरी होगी। केवल परिजनों के आरोपों के आधार पर मौत का कारण तय नहीं किया जा सकता।

घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। परिजनों का कहना है कि उन्हें इलाज और मौत से जुड़े कारणों के संबंध में स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। अस्पताल में प्रसव के दौरान कौन-कौन से चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी ड्यूटी पर थे, महिला की स्थिति कब गंभीर हुई और उस समय क्या उपचार दिया गया, इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी मानी जा रही है।

मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से फिलहाल कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में परिजनों की शिकायत, अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड, ड्यूटी रोस्टर, उपचार के दौरान दी गई दवाओं और संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों के बयान की जांच से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या निर्धारित चिकित्सा प्रक्रिया का उल्लंघन पाया जाता है, तो जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

जच्चा और नवजात की मौत के बाद परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। स्वास्थ्य विभाग या सक्षम जांच एजेंसी की ओर से जांच होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत का वास्तविक कारण क्या था और क्या इलाज के दौरान किसी तरह की चिकित्सकीय लापरवाही हुई थी। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है।